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मुद्रा 2015-16

फसल सिफारिशें

खरीफ फसल- अरहर

कटाई एवं गहाई

कटाई :-

  1. 90 प्रतिशत फल्लियों के पकने के पश्चात ही कटाई करें।

  2. पकने पर फल्ली एवं दाने सुनहरे भूरे रंग में बदल जाते है।

  3. हंसिये के द्वारा कटाई की जा सकती है।

  4. कटी हुई डंडियों को पक्के या कच्चे फर्श पर ढेर बना के रखें।

  5. कटाई के उपरांत दानों को सूखने के लिए धूप में रखें।

छटाई:-

  1. गर्हाई के लिए कटी हुई सूखी फसल को लकड़ी से पीटना चाहिए।

  2. सूखी हुई डंडियों के ऊपर ट्रेक्टर चलाकर भी गहाई की जा सकती है।

  3. दानों को टूटने से बचाना चाहिए।


सुझाव

  1. अच्छी अंकुरण क्षमता वाले प्रमाणित बीजों का उपयोग करें।

  2. संक्रमित क्षेत्रों में कीट एवं रोग प्रतिरोधक किस्में उगाए।

  3. यदि बीज उपचारित नहीं है तो 1 ग्राम बेवस्टीन या 3 ग्राम थाईरम से बीज उपचारित करें।

  4. सल्फर 20-40 कि.ग्रा./हे एवं जिंक सल्फेट 20 कि.ग्रा./हे की दर से उपयोग करें।

  5. अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट 10 टन/हे की दर से एक साल के अन्तराल से उपयोग करें।

  6. उपज बढ़ाने के लिए पौधों के हारमोन एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग करें।

  7. जल जमाव की स्थिति में जल निकास की अच्छी व्यवस्था करें। यदि पानी की कमी हो तो नालियां बनाकर जल का संरक्षण करें।

  8. बीज शोधन बीज उपचार के बाद करें।

  9. राईजाबियम कल्चर 5 से 10 ग्राम /कि.ग्रा. बीज की दर से उपयोग करें।

  10. राईजाबियम कल्चर 10 ग्राम और 5 ग्राम पी.एस.बी. /कि.ग्रा. बीज की दर से बीज शोधन के लिए उपयोग करें।

  11. अधिक जल के निकास के लिए नालियां बनाए।

  12. बोनी के 25-30 दिन एवं 45-50 दिन बाद खरपतवार उखाड़े।

  13. कीटों के निंयत्रण के फेरोमोन प्रपंच का उपयोग करें।

  14. फसल की निम्नलिखित क्रान्तिक अवस्थाओं में नमी, पोषण,गर्मी, धूप और खरपतवार आदि के दबाव से बचाना चाहिए।

  15. अकुंरण कली आने के पहले, फूले आने पर, फल्ली बनने और फल्ली पकने पर।


फसल पश्च तकनीक

सुखाना :-

  1. भंडारण के पहले दानों को एकसमान सूखा लें।

भंडारण :-

  1. उपलब्ध नहीं है।


M.P. Krishi
 
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