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मुद्रा 2015-16
फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - कुटकी
  1. 3 साल में एक बार 5 टन प्रति हेक्टर अच्छी तरह से सड़ी हुई खाद का उपयोग करें। जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे।

  2. खाद का उपयोग बुआई के 2 से 3 सप्ताह पूर्व करें।

  3.  रसायनिक उर्वरकों 20 कि.ग्रा. नत्रजन तथा 20 कि.ग्रा. फास्फोरस प्रति हेक्टेयर की दर से करें।

  4.  जिन क्षेत्रों में पोटाश की कमी हो उनमें 20 कि.ग्रा. पोटाश / हे के रूप में बेसल दें।

  5.  जिन क्षेत्रों में सामान्य वर्षा होती है उन में नत्रजन बुआई के समय दें।

  6.  अधिक वर्षा के क्षेत्र में नत्रजन दो हिस्सों में दे पहली बुआई के समय और दूसरी बोनी के 35-40 दिन बाद दें।


  • कुटकी एक असिंचित फसल की तरह उगाई जाती है।

  • यह खरीफ मौसम में उगाई जाती है और इसे सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती।

  • यदि मिट्टी में पर्याप्त नमी न हो और सिंचाई उपलब्ध हो तो कल्ले बनते समय सिंचाई करें।


  •  अच्छी उपज के लिए अन्तरसस्य क्रियायें जैसे रिक्त स्थान भरना, खरपतवार नष्ट करना, जल निकास की व्यवस्था करना आदि करना चाहिए।

  •  अगर खरपतवार का ज्यादा आक्रमण हो तो खरपतवार उखाड़कर नष्ट करें।

  •  अगर खेत में पानी भरा हो तो जल निकास का व्यवस्था करें।


  • जानकारी उपलब्ध नहीं है


M.P. Krishi
 
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