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खेत में समय समय पर जाकर कीड़ों एवं प्राकृतिक जैविकों का
अवलोकन करना चाहिए।
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कटाई के बाद गहरी जुताई करने से सफेद लट और तना छेदक के
प्रकोप को कम किया जा सकता है।
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अच्छी तरह सड़ी हुई खाद का ही उपयोग करना चाहिए ताकि सफेद लट
के प्रकोप से बचा जा सके।
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फसल चक्र अपनाए।
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अग्रिम बोनी से शूट फ्लाई इत्यादि का प्रकोप कम किया जा सकता
है।
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बीज दर में थोड़ी सी वृध्दि कर बाद में पौध संख्या में विरलन
करें।
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रोग सहनशील / प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।
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गंगा-5 और संकुलित जातियों में तना छेदक कीट का प्रकोप कम
होता है।
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प्रकाश प्रपंच का उपयोग करने से सफेद लट और कार्न छेदक को
निंयत्रित किया जा सकता है। इसके लिए 125 वॉट का मरकरी वेपर का
लेम्प का उपयोग करे।
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फेरोमैन ट्रेप के उपयोग से नर तना छेदक का निंयत्रण किया जा
सकता है।
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हर हेक्टेयर में पांच फेरोमैन टे्रप लगाना चाहिए एवं
प्रतिदिन इनमें एकत्र पखियों को नष्ट करें।
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फसल के पूर्व अवशेषों को नष्ट करें।
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एपेन्टालिस, टाइकोग्रामा, लेडी बर्ड बीटल, केरेबिडस एवं मकडी
इत्यादि मित्र कीटों का संरक्षण करें ।
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फसल पर भुट्टा बेधक (हेलिकोवर्पा आर्मीजेरा) के अण्डे एवं
छोटी इल्लियों दिखाई देने पर हेलिकोवर्पा एन.पी.वी. 250 एल.ई.
(इल्ली समतुल्य) घोल का छिडकाव प्रति हेक्टर की दर से करें ।
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तना छेदक हेतु टाइकोग्रामा चिलोनिस के 75000 अण्डे प्रति
हेक्टर प्रति सप्ताह की दर से फसल पर छोडें ।
रासायनिक कीटनाशकों द्वारा :
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प्ररोह मक्खी द्वारा प्रकोपित क्षेत्रों हेतु कार्बोफ्यूरान 50
एस.पी. द्वारा 100 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार करें ।
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तना छेदक के नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20 ई.सी.1000 मि.ली.
प्रति हेक्टर की दर से उपयोग करें ।
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पत्तियों के आस पास दानेदार दवा कार्बोफ्यूरान 3 जी.10 किग्रा.
प्रति हेक्टर की दर से तना छेदक के नियंत्रण हेतु 4-6 दाने प्रति
पोगली डालें ।
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माहू कीट जो पत्तियों से रस चूसते हैं साथ ही पराग कणों के
झडने में भी कारक होते हैं । इत: इनके नियंत्रण हेतु डाइमिथोएट 30
ई.साी. 750 मिली. प्रति हेक्टर की दर से टसलिंग अवस्था में छिडकाव
करें ।
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भुट्टा बेधक (हेलिकोवर्पा आर्मीजेरा) जो मक्के के दानों को
मुख्य रूप से हानि पहुंचाते हैं । इनके नियंत्रण हेतु इण्डोसल्फान
35 ई.सी. 1500 मि.ली. प्रति हेक्टर की दर से छिडकाव करें ।
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