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मुद्रा 2015-16
फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - मक्का
   सुझाव
  • मक्का प्राय: सभी प्रकार की भूमि में उगाई जा सकती है।

  • खरीफ की तुलना में रबी मौसम में डेढ़ गुना से ज्यादा फसल प्राप्त की जा सकती है।

  • बोनी से पहले आड़ी खड़ी जल निकास नाली बनाना जरूरी है।

  • वर्षा विलम्व से होने पर जून के अन्त में सूखे में बोनी करना आवश्यक है।

  • असिंचित भूमि में ध्दिफसली क्रम के लिए अच्छी शीध्र पकने वाली जातियों का उपयोग करें जैसे जवाहर मक्का -8, जवाहर मक्का-12, चंदन -3, किरण, अरूण।

  • सिंचित भूमि में ध्दिफसली क्रम में मक्का का मध्यम व देरी से पकने वाली संकुलित जातियों का उपयोग करें।

  • उडद बरवटी आदि को अन्तरफसल के रूप में बोने से अतिरिक्त लाभ हो सकता है।

  • संकुलित जातियों में 8 कि.ग्रा. एवं संकर के लिए 7 कि.ग्रा. प्रति एकड़ बीज दर पर्याप्त है।

  • अंकुरण के पश्चात सूखा पड़ने की स्थिति में डोरा चलायें।

  • 15 से 20 दिन के अन्तराल में दो बार डोरा चलाने से खरपतवार नष्ट होता है।

  • 20 दिन बाद इन्डोसल्फान या फयूरोडॉन दानेदार दवा 3 प्रतिशत 8 कि.ग्रा. / हे तीन दाने प्रति पौधे की पोगड़ी में डाले।

  • पौधों की घुटने तक की अवस्था के पूर्व 40 कि.ग्रा यूरिया/एकड़ पौधों की जड़ों के पास डाले व डोरा चलाए।शेष यूरिया 35 कि.ग्रा पर फूल निकलने के पूर्व 10 दिन के अन्तराल से दो बार में डाले व डोरा चलाकर सारपाही द्वारा मिट्टी चढ़ाये।इस प्रकार दो भुट्टे प्रति पौधे बनने में मदद मिलती है।


M.P. Krishi
 
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