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मुद्रा 2015-16

फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - संकर धान


सिंचाई प्रबंधन

  1. जल का उचित प्रंबधन करने से फसल में कल्ले अच्छे निकलते है, नत्रजन का उपयोग अच्छी तरह से होता है एवं नींदा नियंत्रण में सहायक होता है।

  2. जल प्रंबधन के लिये खेत को एकसार समतल करें एवं जल निकास की उचित व्यवस्था करें।

  3. पूरे फसल के दौरान खेत में 2-5 से.मी. पानी भरा रहनें दें।

  4. नत्रजन उर्वरक के टॉप ड्रेसिंग के समय खेत से पानी निकाल दें एवं 24 घन्टे बाद पुन: पानी भरें।

  5. मिट्टी के प्रकार के आधार पर, 50 प्रतिशत फूल आने के 15-20 दिन पहले खेत से पानी निकाल दें।

  6. यह फसल को जल्दी पकने में सहायता करता है साथ ही यांत्रिक विधि द्वारा फसल कटाई के लिये मिट्टी को सख्त बनाता ळें


अन्तर सस्य क्रियायें

  1. खेत में पानी जमाव की स्थिति में अन्तरसस्य क्रियाओं की आवश्यकता नहीं होती।

  2. पानी जमाव न रहने की स्थिति में जहां पर नींदा का प्रकोप हो वहां रोपाई के 25-45 दिन बाद निदाई करना चाहिए।


कटाई एवं गहाई

कटाई :-

  1. धान की कटाई उस समय करना चाहिए जब उसका नमी प्रतिशत 20 से 25 हो।

  2. जब बालियां अपने वजन से झुक जाए और दाने बहुत कड़े और हरे न हो यह अवस्था कटाई के लिए उपयुक्त है।

  3. अगर कटाई के समय दानों में नमी ज्यादा हो तो फंफूद लगने, कीड़े लगने या दाने के अंकुरण होने की समस्या ज्यादा हो जाती है।

  4. अगर फसल पकने के बाद ज्यादा समय में खेत में रहे तो चूहे,पक्षी एवं अन्य कीटों से नुकसान हो सकता है।

  5. धान के खेत से पहले पानी निकासी करें और इसके बाद कटाई करें।

  6. अगर दानों की परिपक्वता के पहले कटाई करें तो दाने की गुणवत्ता का हनन हो सकता है।

  7. हाथ से कटाई के लिए परिपक्व धान के पौधे को जमीन से 20 से 30 से.मी. ऊपर से हंसिए की मदद से काटा जाता है।

  8. यांत्रिक कटाई कम्बाइन हारवेस्टर की मदद से की जाती है। ये एक बड़ी चलित मशीन है जो कि कटाई, गहाई एवं सफाई एक साथ करती है।

  9. यह मशीन 350 से 800 कि.ग्रा.धान 1 घंटे में निकालती है। तथा दानों का हास 3 प्रतिशत से भी कम है।

कटाई :-

  1. कटाई के बाद दानों को सुखाए एवं उसके बाद में गहाई करें।

  2. गहाई थेसर की मदद से की जाती है।

उडावनी:-

  1.  उड़ावनी की आवश्यकता नहीं है।

भंडारण :-

  1. भंडारण बिना मिलिंग धान का करना चाहिए।

  2. भंडारण के पहले नमी का प्रतिशत 12-14 होना चाहिए।

  3. धान की मात्रा के अनुसार भंडारण के लिए सूखा एवं हवारहित संरचना को चुने।

  4. संक्रमण से मुक्ति के लिए मेलाथीयॉन 50 ई.सी. ( 1:100 जलीकरण- 3 लीटर # 100 वर्ग मीटर क्षेत्र की दर से छिड़काव करें।



M.P. Krishi
 
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