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मुद्रा 2015-16

फसल सिफारिशें

रबी फसल -गेहूॅ
किस्में
किस्म
उपज
अवधि
राज्य
गुण

सोनाली एच.पी. 1663 

35-40 क्/हिे

108-110 दिन

उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्र
 

  1. दाने लाल,अर्घ सख्त और आकार में मध्यम रहते है।

  2. सिंचित, अच्छी उपजाऊ भूमि और देर से बोनी के लिए उपयुक्त।

  3. गेरूआ रोग और पत्ती अंगमारी से प्रभावित।

सुजाता
 

25-30 क्/हिे
 

135-140 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. दाने अच्छी किस्म के, चमकदार होते है।

  2. समय पर बोई,सिंचित और असिंचित के लिए उपयुक्त।

  3. गेरूआ रोग से प्रभावित

  4. 1000 बीज का औसत वजन 42 ग्राम होता है।

यू.पी. 2003

50-55 क्/हिे
 

140 दिन
 

पूर्वी उत्तर प्रदेश
 

  1. अर्घ बौनी किस्म।

  2. अच्छी उपजाऊ और सिंचित भूमि में अच्छे परिणाम मिलते है।

यू.पी. 215

-

-

उत्तर प्रदेश

  1. बौनी किस्म गेरूआ रोग से प्रतिरोधक समय पर बोनी और देर से बोनी के लिए उपयुक्त।

यू.पी. 2338
 

60-70 क्/हिे

140 दिन

पंजाब,हरियाणा,उत्तर प्रदेश,दिल्ली और राजस्थान

  1. दाने लाल और रोटी के लिए उपयुक्त।

  2. अच्छी उपज वाली किस्म सिंचित समय पर बोनी और देर से बोनी के लिए उपयुक्त।

यू.पी. 262

50-55 क्/हिे

130-135 दिन

उत्तर प्रदेश,बिहार,असम,पश्चिम बंगाल

  1. दाने लाल,सख्त और बड़े होते है।
    रोटी बनाने के लिए उपयुक्त।
    सिंचित समय पर बोनी और देर से बोनी के लिए उपयुक्त।
    गेरूआ रोग और हेलमिन्थोस्पोरीयम से प्रतिरोधक।

यू.पी. 301

-

-

पश्चिम उत्तर प्रदेश और कर्नाटक

  1. गेरूआ रोग से प्रतिरोधक

यू.पी. 319

-

-

उत्तर प्रदेश,हरियाणा,दिल्ली,पंजाब

  1. गेरूआ रोग से प्रतिरोधक रोटी के लिए उपयुक्त।

यू.पी. 368

-

-

पंजाब,हरियाणा,दिल्ली,राजस्थान,पश्चिम उत्तर प्रदेश

  1. अच्छी उपज वाली किस्म।

  2. समय पर बोनी के लिए उपयुक्त।

  3. गेरूआ रोग और करनाल बंट से प्रतिरोधक।

वी.एल.-401

-

-

उत्तर प्रदेश के पहाड़ी इलाके

  1. असिंचित, मध्यम उपजाऊ जमीन के लिए उपयुक्त

वी.एल.-404

-

-

उत्तर प्रदेश की ऊँची पहाड़ी

  1. असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

वी.एल.-421

-

-

उत्तर प्रदेश,हिमाचल प्रदेश,जम्मू और कश्मीर

  1. कम उपजाऊ और असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  2. गेरूआ रोग से प्रतिरोधक।

डब्लू.जी. 377

45-47 क्/हिे
 

-

-

  1. डबल ड़वार्फ किस्म

  2. दाने आकार में मध्यम एक से और लाल होते है।

  3. पीले और भूरे गेरूआ रोग से प्रभावित।

डब्लू.एच.147
 

-

-

मध्य ,राजस्थान,हरियाणा,बुन्देलखड़,गुजरात,उत्तर प्रदेश

  1. समय पर बोनी के लिए उपयुक्त।

  2. सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  3. बोनी नवम्बर के पहले पखवाड़े में तब करना चाहिए जब तापमान 21 से 23 डि. से. हो।

b.BS.157

-

-

हरियाणा
 

  1.  हरियाणा के सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

डब्लू.एच. 542
 

55-60 क्#हि
 

140-145 दिन

उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र

  1. अच्छी उपज वाली किस्म।

  2. सिंचित, अच्छी उपजाऊ क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  3. गेरूआ रोग से प्रभावी।

  4. दाने लाल,सख्त और आकार में मध्यम होते है।

  5. अर्घ बौनी किस्म।

डब्लू.एल.410

50-52 क्#हि
 

-

-

  1. असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त दाने सख्त,लाल और आकार में मध्यम बड़े होते है।

डब्लू.एल. 711
 

50-52 C/

-

उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र

  1. डबल र्डोफ किस्म।

  2. दाने बड़े और सख्त होते है।

  3. अच्छी उपज।

  4. गेरूआ रोग से प्रतिरोधक।

एच.यू.डब्लू 205

40-45 क्/हिे
 

130 दिन

उत्तर प्रदेश, पूर्व विहार,उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर पूर्व्र राज्य

  1. बौनी किस्म

  2. उपजाऊ भूमि और सिंचित क्षेत्र के लिए।

एच.यू. डब्लू 234

40-45 क्#हि

110 दिन

उत्तर प्रदेश के उत्तरीय पूर्व मैदानी क्षेत्र

  1. देर से बोनी और अच्छे सिंचित उपजाऊ क्षेत्र के लिए।

एच.डब्लू 2004

12-14 क्/हिे

130-135 दिन

मध्य क्षेत्र, मध्य प्रदेश
 

  1. दाने चमकीला बड़ा और रोटी बनाने के लिए अच्छा है।

  2. एक या दो सिंचाई से उपज 16-18 क्/हिे हो सकती है।

  3. 1000 दानों का औसत वजन 42 ग्राम रहता है।

  4. गेरूआ से प्रभावित।

  5. समय पर बोनी और असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  6. बोनी अक्टूबर के दूसरे सप्ताह के बाद और नवम्बर के पहले सप्ताह तक करें।

हाब्रिड -65
 

10-12 क्#हि
 

120-130 दिन

मध्य क्षेत्र

  1. दाना चमकीला बड़ा और रोटी बनाने के लिए उपयुक्त है।

  2. एक या दो सिंचाई से उपज 16-18 क्/हिे हो सकती है।

  3. समय पर बोनी और असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  4. बोनी अक्टूबर के दूसरे सप्ताह के बाद और नवम्बर के पहले सप्ताह तक करें।

आई.डब्लूपी. 72
 

-

-

उत्तर पश्चिम क्षेत्र
 

  1. गेरूआ रोग के लिए प्रतिरोधक असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त

जनक एच.डी.-1981

48-50 क्/हिे
 

-

पूर्वी क्षेत्र

  1. बौनी किस्म

  2. गेरूआ रोग,पानी जमाव,पत्ते झड़ने, अंगमारी से प्रतिरोधक

  3. असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त

जनक एच.डी. 1982
 

-

-

उत्तर प्रदेश, बिहार,पश्चिम बंगाल, असम,उड़ीसा
 

  1. बौनी, मध्यम पकने वाली किस्म

  2. दाने मध्यम, सख्त होते है।

  3. गेरूआ रोग से प्रतिरोधक

  4. समय और देर से बोनी के लिए उपयुक्त ।

जवाहर-17

12-14 क्/हिे

140 दिन

मध्य प्रदेश,मध्य भारत

  1. उच्च प्रोटीन प्रतिशत लगभग 11

  2.  यदि दो सिंचाई दी जाए तो उपज 20-22 क्/हिे तक हो सकती है।

  3. असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  4. भूरे किट्ट,कारनाल बंट के लिए प्रतिरोधक।

जे.एन.के.4 डब्लू 85 जयराज

-

-

मध्य प्रदेश, गुजरात,उत्तर प्रदेश

  1. भूरे किट्टी के लिए प्रतिरोधक।

  2. समय पर बोनी के लिए उपयुक्त

जे.डब्लू.एस.-17
 

23-24 क्/हिे

130-135 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1.  दाने चमकीले, कुछ सख्त होते है।

  2. 1000 बीजों का वजन 42 ग्राम रहता है।

  3. गेरूआ और करनाल बंट प्रतिरोधक ।

के. 65

-

-

उत्तर प्रदेश

  1. ऊँची किस्म

  2. असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त

  3. रोटी बनाने के लिए सबसे उपयुक्त

  4. गेरूआ रोग से प्रभावी।

के.68

-

-

पूर्वी उत्तर प्रदेश

  1. ऊँची किस्म

  2. असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त

  3. रोटी बनाने के लिए सबसे उपयुक्त

  4. गेरूआ रोग से प्रभावी।

के. 8207

28-30 क्#हि

125-128 दिन

उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्र
 

  1. अर्घ बोनी किस्म

  2. कम उपजाऊ और असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  3. गेरूआ और अंगमारी से प्रभावित।

के. 8804 

48-50 क्/हिे

125-130 दिन

उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्र
 

  1. अर्घ बोनी किस्म

  2.  पत्ती अंगमारी से कुछ हद तक प्रभावित।

  3. अच्छी उपजाऊ, सिंचित क्षेत्र और देर से बोनी के लिए उपयुक्त।

  4. दाने लाल, कुछ सख्त और आकार में मध्यम होते है।

के. 9006

45-50 क्/हिे

126-130 दिन

उत्तर पुर्वी मैदानी क्षेत्र
 

  1. दाने लाल, कुछ सख्त और आकार में मध्यम होते है।

  2. पौधे की ऊँचाई 105 से 110 से.मी. रहती है।

  3. अच्छी उपजाऊ, सिंचित क्षेत्र और समय से बोनी के लिए उपयुक्त।

  4. अर्घ बौनी किस्म

  5. पत्ती अंगमारी से कुछ हद तक
    प्रभावित।

मालवी एच.यू.डब्लू1

42-45 दिन

-

पूर्वी उत्तर प्रदेश

  1.  इस किस्म से बना ब्रेड बहुत अच्छा होता है।

  2. बोनी का समय अनिश्चित होती है।

मेघदूत

10-12 क्/हिे

130-135 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. दाने बड़े होते है।

  2. यह किस्म का उपयोग मैदा और सूजी बनाने के लिए होता है।

  3. असिंचित और समय पर बोनी के लिए उपयुक्त।

मुक्ता

12-14 क्/हिे

130-135 दिन
 

मध्य प्रदेश
 

  1. गेहूँ की बाले लम्बी और रोयेदार होती है।

  2. एक या दो सिंचाई से उपज 16-18 क्/हिे तक हो सकती है।

  3. असिंचित और समय पर बोनी वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  4. बोनी अक्टूबर के दूसर सप्ताह के बाद और नवम्बर के पहले सप्ताह के बीच करें।

नर्मदा-112

10-12 क्/हिे

128-135 दिन

मध्य प्रदेश, मध्य भारत

  1. दाने चमकीले, बडे अौर रोटी बनाने के लिए उपयुक्त है।

  2. एक या दो सिंचाई से उपज 16-18 क्/हिे तक हो सकती है।

  3. असिंचित और समय पर बोनी वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  4. बोनी अक्टूबर के दूसरे सप्ताह के बाद और नवम्बर के पहले सप्ताह के बीच करें।

  5. भूरे किट्टी के लिए प्रतिरोधक।

  6. गेरूआ रोग से प्रभावित।

नर्मदा-195
 

10-13 क्/हिे

130-135 दिन

मध्य प्रदेश, मध्य भारत

  1. दाने चमकीले, बडे अौर रोटी बनाने के लिए उपयुक्त है।

  2. एक या दो सिंचाई से उपज 16-18 क्/हिे तक हो सकती है।

  3. असिंचित और समय पर बोनी वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  4. बोनी अक्टूबर के दूसर सप्ताह के बाद और नवम्बर के पहले सप्ताह के बीच करें।

  5. गेरूआ रोग से प्रभावित ।

  6. भूरे किट्ट के लिए प्रतिरोधक।

नर्मदा-4

10-12 क्/हिे

125-130 दिन

मध्य प्रदेश, मध्य भारत

  1. दाने चमकीले, बडे अौर रोटी बनाने के लिए उपयुक्त है।

  2. एक या दो सिंचाई से उपज 16-18 क्/हिे तक हो सकती है।

  3. असिंचित और समय पर बोनी वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  4. बोनी अक्टूबर के दूसर सप्ताह के बाद और नवम्बर के पहले सप्ताह के बीच करें।

  5. गेरूआ रोग से प्रभावित ।

  6. भूरे किट्ट के लिए प्रतिरोधक।

एन.आई.747-119

-

-

महाराष्ट,कर्नाटक

  1. अच्छी उपजाऊ, असिंचित क्षेत्र और समय से बोनी के लिए उपयुक्त।

पी.बी.डब्लू 154
 

50-55 क्/हिे

135-140 दिन

उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र
 

  1. अर्घ बोनी किस्म

  2. औसत ऊँचाई 105 से.मी. रहती है।

  3. समय पर बोनी, सिंचित, कम उपजाऊ के लिए उपयुक्त।

पी.बी.डब्लू 175
 

30-35 क्/हिे

145-148 दिन

उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र
 

  1. दाने लाल,सख्त और बड़े रहते है।

  2. असिंचित कम उपजाऊ और समय पर बोनी के लिए उपयुक्त।

पी.बा.डब्लू 215
 

50-55 क्/हिे

140 दिन

उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र
 

  1. दाने सख्त,लाल और बड़े होते है।

  2.  सिंचित और अच्छे उपजाऊ क्षेत्र के लिए उपयुक्त।

  3. गेरूआ रोग से प्रतिरोधक

पी.बी.डब्लू 226
 

40-45 क्/हिे

120-125 दिन

उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र
 

  1. देर से बोनी, सिंचित और अच्छी उपजाऊ क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  2. गेरूआ से कुछ हद तक प्रभावित।

  3. दाने लाल,अर्घ सख्त और आकार में मध्यम होते है।

पी.बी. डब्लू 34
 

48-50 क्/हिे

-

उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र
 

  1. दाने लाल,सख्त और बड़े होते है।

  2. मेक्रोनी बनाने के लिए उपयुक्त।

  3. समय पर बोनी, सिंचित और अच्छे उपजाऊ क्षेत्र के लिए उपयुक्त।

प्रताप एच.डी.-1981 

38-40 क्/हिे

-

उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र
 

  1. बौनी किस्म गेरूआ से प्रतिरोधक

  2. असिंचित,मध्यम उपजाऊ और देर से बोनी के लिए उपयुक्त।

राज 3007 

40-45 क्/हिे
 

125 दिन

उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र
 

  1. दाने लाल,सख्त, मध्यम बड़े होते है।

  2. अर्घ बौनी किस्म।

  3. देर से बोनी,सिंचित और उपजाऊ क्षेत्र के लिए उपयुक्त।

  4. क्षारीय मिट्टी के क्षेत्रों में उगाई जाती है।

शैलीजा

-

-

हिमाचल प्रदेश

  1.  सामान्य बोनी,मध्यम उपजाऊ क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

ऐ.जी. 30-1
 

10-12 क्/हिे

100-120 दिन

कक

  1. समय पर बोनी, असिंचित के लिए उपयुक्त।

  2. बोनी के लिए उपयुक्त समय अक्टूबर के अन्त से नवम्बर के शुरुवात में। परन्तु 15 अक्टूबर से पहले नहीं।

अर्जुन एच.डी. 2009 

-

-

पश्चिम उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब,दिल्ली,राजस्थान
 

  1. अच्छी उपज और बौनी किस्म

  2. गेरुआ रोग से प्रतिरोधक

  3. दाने छोटे, पीले और थोड़े सख्त से मुलायम।

  4. सिंचित, समय पर और सामान्य बोनी के लिए उपयुक्त।

सी. -306
 

10-13 क्/हिे

135-140 दिन

मध्य क्षेत्र, मध्य प्रदेश
 

  1. दाने चमकीले, बड़े और रोटी बनाने के लिए अच्छे।

  2. एक या दो सिंचाई से उपज 16-18 क्विटल पहुच जाती है।

  3. 1000 दानों का वजन 40 ग्राम रहता है।

  4. असिंचित और समय पर बुवाई के लिए उपयुक्त।

  5. फसल अक्टूवर के दूसरे सप्ताह के बाद और नवम्बर के पहले सप्ताह में बोनी करना चाहिए।

सी.पेन 3004 सेन

55-60 क्/हिे

140-142 दिन

उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र
 

  1. अर्घ बौनी किस्म

  2. औसत पौधे की उँचाई 100 से.मी.

  3. समय पर बोनी, सिंचाई और अच्छी उपजाऊ भूमि के लिए।

  4. गेरुआ रोग के लिए प्रतिरोधक

  5. दाने सख्त और आकार में मध्यम।

डी.डी.के. 1001
 

25-32 क्/हिे

105-110 दिन

कर्नाटक, तमिलनाडु और आध प्रदेश

  1. सिंचित किस्म

डी.डी.के. 1009
 

25-32 क्/हिे

105-110 दिन

कर्नाटक, तमिलनाडु और आध प्रदेश

  1. सिंचित किस्म

डी.एल. 803

50-60 क्/हिे

120-125 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. दाने का आकार मध्यम होता है।

  2. सिंचित किस्म है समय पर बोनी के लिए।

  3. बोनी के लिए उपयुक्त समय 15-25 नवम्बर है।

  4. 1000 बीज का वजन 40-42 ग्राम रहता है।

  5. यह शरबती किस्म है।

डी.डब्लू.आर. 162
 

25-37 क्/हिे

105-110 दिन

कर्नाटक, तमिलनाडु और आध प्रदेश

  1. सिंचित किस्म

डी.डब्लू.आर. 185 

25-37 क्/हिे

100-105 दिन

कर्नाटक, तमिलनाडु और आध प्रदेश

  1. सिंचित किस्म

डी.डब्लू.आर. 2006

13-15 क्/हिे

105-110 दिन

कर्नाटक, तमिलनाडु और आध प्रदेश

  1. सिंचित किस्म

जी. डब्लू. -173

40-50 क्/हिे

110-115 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. यह शरबती किस्म है।

  2. बोनी के लिए अनुकुल समय 15-20 दिसम्बर है।

  3. 1000 बीज का औसत वजन 40-42 ग्राम है।

जी. डब्लू-190

50-60 क्/हिे

125-130 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. यह शरबती किस्म है।

  2. बोनी के लिए अनुकुल समय 15-25 नवम्बर है।

  3. सिंचित किस्म है समय पर बोनी के लिए।

  4. 1000 बीज का औसत वजन 40-42 ग्राम है।

एच.डी. 2135

-

-

तमिलनाडु, कर्नाटक

  1. तमिलनाडु, कर्नाटक के पहाड़ी इलाके जहाँ मध्यम उपजाऊपन हो।

एच.डी. 2177

48-50 क्/हिे

-

उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र
 

  1. दूनी बौनी किस्म

  2. जल्दी या समय पर बोनी और उच्च उपजाऊ भूमि के लिए उपयुक्त।

  3. सभी प्रकार के गेरूआ रोग के लिए प्रतिरोधक

  4. दाने अन्य किस्मों से बड़े होते है।

एच.डी 2189

48-50 क्#हि

-

भारतीय प्रायदीप

  1. बौनी किस्म

  2. समय पर बोनी और अच्छी उपजाऊ

  3. मिट्टी के लिए उपयुक्त।

  4. गेरूआ रोग से प्रतिरोधक 

एच.डी 2285
 

-

120 दिन

पश्चिम भारत

  1. देर से बोनी वाली बौनी किस्म

  2. दाने थोड़े सख्त, मध्यम आकार के होते है।

  3. गेरूआ से रोगग्राही

एच.डी. 2329
 

-

-

उत्तर पश्चिम मैदानी क्षेत्र
 

  1. बौनी किस्म

  2. सिंचित, समय पर बोनी और उपजाऊ क्षेत्र के लिए उपयुक्त

  3. दाने सख्त और मध्यम आकार के होते है।

  4. गेरूआ रोग से प्रभावी

एच.डी. 4502 मालवी

-

-

महाराष्ट,कर्नाटक, आंध प्रदेश, तमिलनाडु

  1. सामान्य बोनी स्थिति के लिए उपयुक्त।

एच.डी.4530 

-

-

मध्य भारत, मध्य प्रदेश
 

  1. बौनी किस्म

  2. गेरूआ रोग के लिए प्रतिरोधक

  3. दाने चमकीला होता है और ज्यादा बोई जाती है।

एच.डी. 4672 मालवा

13-22.5 क्/हिे

130-138 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. गेरूआ रोग से प्रतिरोधक।

  2. असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त

  3. अन्य किस्मों की अपेक्षा इसमें ज्यादा प्रोटीन होता है।

  4. इसमें विटामिन ए होता है।

  5. नुडलस, सिमैया, सूजी,दलिया बनाने के लिए उपयुक्त ।

एच.डी. 4672

13-16 क्/हिे

130-138 दिन

मध्य क्षेत्र, मध्य प्रदेश

  1.  गेरूआ रोग से प्रभावित

एच.डी.आर. 77

30-35 क्/हिे

115-117 दिन

उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्र
 

  1. कम उपजाऊ भूमि और असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त।

  2. पत्ती गेरूआ और अंगमारी से कुछ हद तक प्रभावित ।

  3. दाने रंग के, कुछ सख्त और मध्यम बड़े होते है।

एच.आई.-1077 मंगला
 

50-60 क्/हिे

125-135 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. बोनी के लिए उपयुक्त समय 10-15 नवम्बर है।

  2. 1000 बीजों का वजन 42-45 ग्राम रहता है।

  3. दाने शरबती और आकार मध्यम होता है।

  4. भूरे किट्टी के लिए प्रतिरोधक।

एच.आई. 8381

50-60 क्/हिे

130-135 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. बोनी के लिए उपयुक्त समय 10-20 नवम्बर है।

  2. 1000 बीजों का औसत वजन 48-52 ग्राम है।

  3. भूरे किट्टी के लिए प्रतिरोधक।

  4. दाने सख्त और चमकीले होते है।

  5. दाने आकार में मध्यम और मोटे होते है।

एच.आई.8498 

-

-

मध्य प्रदेश
 

  1. मध्य प्रदेश के लिए उपयुक्त

  2. सिंचित भूमि के लिए।

एच.आई. 977

40-45 क्/हिे

115-120 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. दाने लम्बे और आकार में मध्यम होते है।

  2. बोनी के लिए उपयुक्त समय 15-20 दिसम्बर के बीच है।

  3. पौधे की ऊँचाई 85-90 से.मी. रहती है।

  4. 1000 बीजों का औसत वजन 40-42 ग्राम रहता है।

एच.पी. 1100

-

-

पूर्वी भारत

  1. गेरूआ रोग से प्रतिरोधक

  2. देर से बोनी, सिंचित और अच्छी उपजाऊ क्षेत्र के लिए।

एच.पी. 1102

-

-

पूर्वी भारत

  1. समय पर बोनी सिंचित और अच्छी उपजाऊ के लिए उपयुक्त।

एच.पी. 1209

38-40 क्/हिे

108-110 दिन

उत्तर पूर्व मैदानी क्षेत्र

  1. दाने रंग का, कुछ सख्त और मध्यम आकार के रहते है।

  2. पौधे की ऊँचाई 80 से.मी. रहती है।

  3. गेरूआ रोग और अंगमारी से कुछ हद तक प्रभावित ।

  4. बौनी और जल्दी पकने वाली किस्म।

जी.डब्लू.-273

55-60 क्/हिे

111-115 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. समय पर बुआई के लिए सिंचित अवस्था में उपयुक्त है।

  2. मिट्टी की पोषक तत्व की मात्रा अधिक होनी चाहिए।

एच.आई -1077

45-48 क्/हिे

120-125 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. समय पर बोनी और सिंचित अवस्था के लिए उपयुक्त।

डी.एल.-788-2

40-45

120-125 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1.  देर से बोनी एवं सिंचित अवस्था के लिए उपयुक्त है।

एच.आई-1418

50-55

115-120 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1.  समय और देर से बुआई के लिए उपयुक्त।

एच.आई-454

45-50

105-115 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. देर से बोनी के लिए उपयुक्त।

राज-1555

35-45

122-127 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1.  समय पर बोनी और सिंचित अवस्था के लिए उपयुक्त।

राज 3765

43-47

105-110 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1.  देरी से बुआई के लिए उपयुक्त।

एच.डब्लू-2004

14-16

135-140 दिन

मध्य प्रदेश
 

  1. असिंचित अवस्था एवं कम उपजाऊ क्षेत्र के लिए उपयुक्त।

एम.पी.-4010

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गुजरात, मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश

  1. सिंचित एवं देर से बोनी हेतु


M.P. Krishi
 
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