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मुद्रा 2015-16
फसल सिफारिशें
रबी फसल - कुसुम
  कटाई एवं गहाई

कटाई :-

  1. सामान्यत: किस्म और कृषि जलवायु क्षेत्र के अनुसार करडी 140 से 150 दिनों में पक जाती है।
  2. पत्तियां और पखुड़ियों के भूरे होने पर फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
  3. कटाई हंसिये की मदद से एवं दस्ताने पहन कर की जाती है ( कांटे वाली किस्में में -ज्ञतनजप क्मअ 010 अमय यांत्रिक विधि से कटाई में विभिन्न ट्रेक्टर चलित यंत्रों का प्रयोग किया जाता है जिससे कटाई आसान हो जाती है।
  4. पौधे को पूरा उखाड़कर भी धूप में सूखाया जाता है ताकि उसकी पूरी नमी निकल जाए।
  5. कटाई हमेशा सुबह के समय करनी चाहिए ताकि दाने कम झड़े।

छटाई:-

  1. छटाई तब करना चाहिए जब दाने एवं पौधे अच्छी तरह से सूख जाए।
  2. छटाई के लिए दाने वाले भाग पर लकड़ी से पीटना चाहिए।
  3. हस्त चलित या पावर चलित थेशर का उपयोग भी किया जा सकता है।
  4. स्टोन रोलर के द्वारा भी छटाई की जा सकती है जो या तो बैलों या मानव चलित होते है।

उठावनी :-

  1. उड़ावनी में दानों का छोड़कर वाकी सभी पदार्थ को अलग किया जाता है।
  2. हवा की विपरीत दिशा में खड़े होकर थोड़ी ऊंचाई से फटकने से दाने अलग हो जाते है।

 फसल पश्च तकनीक

सुखाना :-

  1. सुखाना एक बहुत महत्वपुर्ण प्रक्रिया है जिससे फसल का भंडारण किया जाता है और कीट इत्यादि से भी बचाया जाता है।
  2. पक्के फर्श पर सुखाया जाता है और उपज को बार बार ऊपर नीचे किया जाता है
  3. जिससे सभी दानों को समान धूप मिलें।
  4. सुरक्षित भंडारण हेतु करडी की नमी 10-12 प्रतिशत होनी चाहिए।
  5. गहाई के बाद में 5 से 8 दिन तक बीजों को धूप में सुखाना चाहिए जिससे सुरक्षित भुंडारण के लिए नमी की मात्रा कम की जा सके।

भंडारण :-

  1. भंडारण करना आवश्यक है जिससे जरूरत के समय उपयोग करने के लिए अनाज उपलब्ध हो सके। अधिक समय तक करडी का भंडारण नहीं करना चाहिए क्योंकि ज्यादा समय तक भंडारण करने से तेल की गुणवत्ता में कमी आती है।
  2. पूसा बिन या हवाबंद पात्रों में भंडारण करना चाहिए जिससे कीट इत्यादि का आक्रमण न हो।
     

M.P. Krishi
 
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