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मुद्रा 2015-16

फसल सिफारिशें

रबी फसल - कुसुम

  सुझाव

  1. बोनी जल्दी करें।

  2. असिंचित फसल के लिए बोनी के बाद भी मिट्टी में पर्याप्त नमी होना चाहिए।

  3. गहरी मिट्टी में करडी उगाना चाहिए।

  4. बीज गहरा बोना चाहिए।

  5. मिट्टी परीक्षण मान के आधार पर संतुलित उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए।

  6. नत्रजन की मात्रा अलग अलग भागों में डाले और पोषक तत्वों की कमी छिड़काव द्वारा पूरा करे।

  7. फसल चक्र में दलहनी फसलों का उपयोग करें।

  8. फसल अवशेषों को नष्ट करें।

  9. गंधक युक्त उर्वरकों का उपयोग करें।

  10. धान सरसों के क्रम में हरी खाद का उपयोग धान के पहले करना चाहिए जिससे बाद की फसल में उर्वरकों का उपयोग कम करना पड़े जिससे बचत होती है।

  11. अच्छी तरह से सड़ी हुई खाद के उपयोग से मिट्टी की नमी संरक्षण क्षमता बढ़ती है और हवा का आवागमन रहता है।

  12. रोग रहित बीजों का उपयोग करें।

  13. उन्नत किस्मों का उपयोग करें।

  14. पूर्व फसल के अवशेषों ठूंठ इत्यादि को नष्ट करने हेतु कटाई के समय इन्हें गहराई से खोद कर नष्ट करें ।

  15. बोनी क्षेत्र विशेष के लिए अनुमोदित अवधि में ही करें। उत्तर भारत में अक्टूबर के मध्य बोई गई फसल में रोग एवं कीटों का आक्रमण कम होता है।

  16. फसल चक्र अपनाए जिससे मिट्टी कीटों के प्रति संक्रमित न हो ।

  17. बीज उपचार करें।

  18. निंयत्रित मात्रा में सिंचाई करें जिससे क्लब रॉट का संक्रमण कम हो सके।

  19. मिट्टी में चूना मिलाए जिससे मिट्टी का पी.एच. 7.2 रहे ।

  20. परपोषी पौधों को बीज जमने के पहले उखाड़ कर फेंक दे।

  21. समय पर सिंचाई करें जिससे सरसों शॉ लाई का आक्रमण कम हो।

  22. चितकबरी इल्ली का आक्रमण होते ही पौधे की छटाई कर दे और पौधे के टूटे भागों को जला दे।

  23. संक्रमित पत्तियों को तोड़ दे और जला दे जिससे लार्वा और प्यूपा मर जाएगें। बिहार की रोयेदार इल्ली को यांत्रिक विधियों से नियंत्रित करें।

  24. देर से बोनी से उपज में कमी आती है।


M.P. Krishi
 
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