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मुद्रा 2015-16

फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - ज्वार

रोग प्रबंधन - ज्वार


रोग

चारकोल रॉट

हिन्दी नाम

काली सड़न-

कारक जीवाणु

मेक्रोफेमिना फेसीयोलिना

लक्षण एवं क्षति

  1. फंफूद जनित इस रोग में प्रमाणित पौधों के तने मध्य भाग में सुकुड़ जाते है।

  2.  फाड़कर देखने पर काले रंग के स्क्लेरोशिया दिखाई देते है।

  3. हल्की हवा चलने पर पौधे टूटकर गिर जाते है।

नियंत्रण

  1. बीज उपचार करें।

आई.पी. एम

  1. फसल चक्र अपनाए।

  2.  खेत में समय समय पर सफाई करें।

  3.  पौधों के विकास के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी


रोग

एन्थ्रकनोज

 

 

हिन्दी नाम

एन्थ्रकनोज

कारक जीवाणु

कोलेटोट्राइकम ग्रमिनिकालम

लक्षण एवं क्षति

  1. इस रोग के धब्बे गोल तथा अण्डाकार जिनका किनारा रंगीन और केन्द्र सफेद होता है।

  2.  ये धब्बे 2-4 मि.मी. लम्बे और 1.2 मि.मी. चौड़े होते है।

  3.  ये धब्बे क्रमश:आकार में बढ़ते और इनके केन्द्र में ' काला डॉट ' जिसे एसर बुलाई कहते है।

  4.  बहुत से धब्बे पैदा होकर पत्ती को सूखा देते है।

  5.  यह बीमारी रोगग्रस्त बीज तथा कंडवी रोग ग्रसित पत्तियों से पैदा होती है।

नियंत्रण

  1. 3.0 ग्राम/ कि.ग्रा. बीज थाईरम या 1.5 ग्राम/कि.ग्रा बीज कार्बानडिजिम से बीज उपचारित करें।

  2.  मेनकोजेब 3.0 ग्राम /लीटर की दर से फसल पर छिड़काव करें।

आई.पी. एम

  1.  खरपतवार और फसल अवशेषों को नष्ट करें।

  2.  फसल चक्र अपनाए।

  3.  प्रतिरोधक किस्में जैसे सी.एस.एच.-1 और सी.एस.एच.-2का बोये।


रोग

शर्करा रोग ( अर्गट )

 

हिन्दी नाम

शर्करा रोग ( अर्गट )

कारक जीवाणु

स्फेसीलिआ सोर्गाइ

लक्षण एवं क्षति

  1. यह बीमारी ज्वार में भुट्टे निकलते समय यदि पानी बरसता है तो पैदा होती है।

  2.  कुछ दिनों बाद सख्त भूरे रंग के सींग के समान संरचना दिखाई देती है जो कि रोग जनक के स्क्लेरोशिया होते है।

नियंत्रण

  1.  स्क्लेरोशिया मुक्त बीज बोयें।

  2.  बीज बोने से पहले 20 प्रतिशत नमक के घोल में डुबाकर बीज को स्क्लेरोशिया मुक्त कर उपचारित करे

आई.पी. एम

  1.  खरपतवार और फसल अवशेषों को नष्ट करें।

  2.  फसल चक्र अपनाए।

  3.  प्रतिरोधक किस्में जैसे सी.एस.एच.-1, एस.पी.एच-1 और एस.पी.वी-191 को बोये।


रोग

ग्रेन स्मट

 

 

हिन्दी नाम

दानों का कंडवा रोग

कारक जीवाणु

स्फेरोथिका सोर्घाई

लक्षण एवं क्षति

  1. दानों के कंड रोग की पहचान आसान है।

  2.  दाना भरते समय यह रोग होता है।

  3.  दानों में काला चूर्ण भर जाता है।

  4.  बीजों को तोड़ने पर उनमें चूर्ण भरा दिखाई देता है।

नियंत्रण

  1. 3.0 ग्राम/ कि.ग्रा. बीज थाईरम या 1.5 ग्राम/कि.ग्रा बीज कार्बानडिजिम से बीज उपचारित करें।

  2.  मेनकोजेब 3.0 ग्राम /लीटर की दर से फसल पर छिड़काव करें।

आई.पी. एम

  1. फसल चक्र अपनाए।

  2.  खरपतवार और फसल अवशेषों को नष्ट करें।


रोग

डाऊनी मिल्डयू

 

हिन्दी नाम

 मुदरोमिल रोग


कारक जीवाणु

 स्ैलेरोकोला सोर्गाई

लक्षण एवं क्षति

  1. रोग से प्रभावित पौधे की पत्तियां हल्के पीले रंग की होती है। और उन पर सूक्ष्म मुदरोमिल वृध्दि दिखाई देते है।

  2.  पौधे कमजोर हो जाते है और 5-6 सप्ताह बाद पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देते है।

  3.  बाद में पत्तियां फटकर चिथड़े हो जाती है।

  4.  पौधों की वृध्दि रूक जाती है।

नियंत्रण

  1.  4.0 ग्राम/ कि.ग्रा. बीज मेटालेक्सल से बीज उपचारित करें।

  2.  मेनकोजेब 3.0 ग्राम /लीटर की दर से फसल पर छिड़काव करें।

आई.पी. एम

  1.  प्रतिरोधक किस्म बोये।

  2.  फसल चक्र अपनाए।

  3.  प्रभावित पौधे के अवशेष नष्ट करें।


रोग

लीफ रस्ट

 

हिन्दी नाम

गेरूआ रोग

  

कारक जीवाणु

एक्सोनिया पुरपुरिया

लक्षण एवं क्षति

  1. फसल की हर अवस्था रोग से प्रभावित होती है।

  2.  रोग निचली पत्तियों के किनारों से शुरू होता है।

  3.  धब्बे ज्यादातर निचली सतह पर होते है।

  4.  रोग ग्रस्त पत्ती भूरे धब्बे से घिरी रहती है तथा धब्बों पर हाथ रगड़ने पर रंग निकलता है।

  5.  पौधा का विकास थम जाता है और पत्तियां समय से पहले सूखकर गिर जाती है।

नियंत्रण

  1. 3 ग्राम/हे मेनकोजेब 10 स1 12 दिन के अंतराल पर छिड़क 

आई.पी. एम

  1. सल चक्र अपनाए।

  2.  खेत की समय समय पर साफ सफाई करें


रोग

ग्रेन मोल्ड

 

हिन्दी नाम

 दाने का फंफूदी रोग

  

कारक जीवाणु

फयूजेरियम स्पी

लक्षण एवं क्षति

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नियंत्रण

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आई.पी. एम

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M.P. Krishi
 
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