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मुद्रा 2015-16
फसल सिफारिशें

खरीफ फसल- अरहर
 आई. पी. एम.

एकीकृत रोग नियंत्रण

  1. प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।

  2. अल्टानेरिया पत्ती धब्बा के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे डी.ए. 2, एम.ए. 128-1,एम.ए. 128-2,20-105 ( पश्चिम बंगाल -ज्ञतनजप 010 )

  3. जीवाणु पत्ती धब्बा एवं स्टेम केंकर के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे आई.सी.पी.एस 12807, 12848,12849,12937,13051,13116 एवं 13148 उकटा के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे यू.सी. 796#1, 2113#1, 2515#2, 2568#1 जीवाणु पत्ती धब्बा के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे एल.1, बी.ओ.एन.-2 बीरसा अरहर -1, डी.एल. -82, एच.-76-44, 76-51,76-11,76-65, आई.सी.पी. 8963 ( मारूति-ज्ञतनजप क्मअ 010अमय, 91-45, आई.सी.पी.एल. 267, मुक्ता, प्रभात, शारदा, टी.टी.-5, 6।

  4. फाईटोपथोरा अंगमारी के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे एच.वाय-4, आई.सी.पी.एल.-150, 288,304,के.पी.बी.आर.-80-1-4, 80-2-1 चूर्णित आसिता के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे आई.सी.पी. 9150, 9177 किट्ट के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे ब्लानको, टोडो टेम्पो एवं नम्बर 17 नुपंसकता मोजेक के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे बागेश्वरी, बहार, डी.ए. -13, आई.सी.पी.एल. -86, 146, 87051, एम.ए-165, 166, पी.डी.ए. -2,10 एवं रामपुर बहार फोमा स्टेम केंकर के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे बी.ओ.एन.

  5. आई.सी.पी.एल. 83057, एम.आर.ली. 66 हेलो ब्लाइट के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे जी.डब्लू 3 एवं आई.सी.पी. 362 फाइलोस्लटीका पत्ती अंगमारी के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे ई.एम.सी., आई.सी.पी.एल.-269, 335, पूसा-33, 35 रूट नॉट निमाटोड के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे आई.सी. पी. 11289, 11299 डरटी नॉट निमाटोड के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे आई.सी. पी. 12744, ए.जी.एस. 522, बंसत,जी.ए.यू.टी. 84-72, 83-23, 84-22, और पी.डी. एम.-1 सूखा जड़ सड़न के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे आई.सी.पी.एल.-86005, 86020, 87105, 91028

  6. गहरी जुताई करें।

  7. पुरानी फसल के अवशेषों को उखाड़कर नष्ट करें।

  8. रोग मुक्त खेतों से बोने के लिए बीज लें।

  9. प्रमाणित बीजों का उपयोग करें।

  10. समय पर बोनी करें।

  11. कतार से कतार की दूरी 30 से 40 से.मी. रखें।

  12. यदि बीज उपचारित नहीं है तो बीज उपचारित करें।

  13. संवेदनशील इलाकों में सहनशील एवं प्रतिरोधक किस्में बोये।

  14. खरपतवार के पौधे के उगते ही उखाड़े।

  15. कीटनाशी के उपयोग से कीट रोग एवं सूत्रकृमि को नियंत्रित करें।

  16. संक्रमित पौधे को खेत से उखाडकर नष्ट करें।

  17. रोग ग्रसित खेतों में फसल न उगाये।

  18. गेंहू के साथ फसल चक्र अपनाए।

  19. ज्वार, तम्बाखू और अरण्डी आदि के लिए अरहर को अन्तरवर्तीय फसल के रूप में उगाए।
     

एकीकृत कीट नियंत्रण :-

  1. चने के फल्ली भेदक के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे आई.सी.पी.एल. 6, 2, 269,332,187-1, 1811-ई.-3, फल्ली मक्खी के लिए प्रतिरोधक किस्में जैसे आईसी.पी.एल. 6, 1903, आई.सी.पी. ई-1ए 7946-ई.-1, 7176-5, पी.डी.सी. -37-3, 8094-2-एस.-2, 802-5-51 और एम.ए.आई. पुरानी फसल के अवशेषों एवं खरपतवारों को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. समय पर बोनी करें।

एकीकृत खरपतवार नियंत्रण :-

  1. प्रमाणित बीजों का उपयोग करें।

  2. अपने कृषि जलवायु क्षेत्र के अनुसार समय पर बोनी करें।

  3. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  4. सकरी कतारें एवं ज्यादा बीज दर खरपतवार नियंत्रण में सहायक होते है।

  5. कतार में बोनी करने से अन्तरसस्य क्रियाओं में सहायक होती है।

  6. उर्वरक का उपयोग बीज के नीचे करें।

  7. 'हो' का उपयोग अन्तरसस्य क्रियाओं के लिए करें।

  8. साफ यंत्रों का उपयोग करें।

  9. फसल चक्र दलहनी फसलों के साथ न करें।

  10. नत्रजन का अधिक उपयोग न करें।

  11. अधिक सिंचाई न करें।

  12. नींदानाशकों का उपयोग फ्लेटफेन नोजल की सहायता से करें।
     

M.P. Krishi
 
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