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मुद्रा 2015-16
फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - अरहर

रोग प्रबंधन - अरहर


रोग अल्टानेरिया पत्ती झुलसन
हिन्दी नाम अल्टानेरिया पत्ती झुलसन

कारक जीवाणु अल्टानेरिया 
लक्षण एवं क्षति 

-
नियंत्रण

  1. मेनेब 3 ग्राम/लीटर की दर से डाले।
आई.पी. एम 
  1. प्रतिरोधक किस्में जेसे कि डी.ए. 2, एम.ए. -128-1, एम.ए. -128-2, 20-105 ( पश्चिम बंगाल को उगाए।
  2. बहुवरर््षाी अरहर के पास फसल न लगाए।

रोग जीवाणु पत्ती धब्बा  

हिन्दी नाम बेक्टीरियल लीफ स्पाट

 
कारक जीवाणु  -
लक्षण एवं क्षति 

-
नियंत्रण

  1. प्रतिलीव पदार्थ जैसे कि स्ट्रेपटोसाइक्लीन या टेट्रासाइक्लीन 100 माइक्रो ग्राम /लीटर की दर से 10 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करें।
आई.पी. एम 
  1. प्रतिरोधक किस्में जैसे कि आई.सी.पी. 12807,12849,12937,13051, 13116 और 13148 को उगाए।
  2. जिन खेतों में जल निकास की अच्छी व्यवस्था हो उन खेतों का चयन करें।
  3. स्वस्थ बीजों का उपयोग करें।

रोग बॉट्रेटिस ग्रे मोल्ड  

हिन्दी नाम बॉट्रेटिस ग्रे मोल्ड
कारक जीवाणु  -
लक्षण एवं क्षति  -
नियंत्रण

  1. रोनीलन या डेकोनिल 3 ग्राम/लीटर की दर से छिड़काव करें।
आई.पी. एम  -

रोग सरकोस्पोरा पत्ती धब्बा    
हिन्दी नाम सरकोस्पोरा पत्ती धब्बा
कारक जीवाणु 

सरकोस्पोरा इंडिका
लक्षण एवं क्षति 

-
नियंत्रण

  1. 3 ग्राम/लीटर पानी में मेनेब का छिड़काव करें।
आई.पी. एम 
  1. प्रतिरोधक किस्में जैसे यू.सी. -796/1, 2113/1, 2515/2, 2568/1 इत्यादि का उपयोग करें।
  2. बहुवर्षी अरहर खेतों से दूर खेतों का चुनाव करें।
  3. स्वस्थ पौधे से बीज एकत्रित करें। 

रोग सूखी जड़ सड़न  
हिन्दी नाम सूखी जड़ सड़न
कारक जीवाणु  -
लक्षण एवं क्षति  -
नियंत्रण

-
आई.पी. एम 
  1. स्वस्थ खेती करें।
  2. जिन क्षेत्रों में सूखी जड़ सड़न का प्रभाव हो वहां पर फसल चक्र अपनाए।

रोग फ्यूजेरियम विल्ट  
हिन्दी नाम उकटा या ग्लानी रोग 

कारक जीवाणु  फ्यूजेरियम उडम
लक्षण एवं क्षति  -
नियंत्रण

  1. बीजों पर 3 ग्राम बनजेट 50 प्रतिशत तथा थाईरम 50 प्रतिशत /कि.ग्रा. बीज की दर से परत चढ़ायें।
    या
    बीज उपचार जैवकारक जैसे टीएच या जीवी 3 ग्राम/कि.ग्रा. बीज दर से करें।
    या
    बीज उपचार विटावेक्स तथा थाईरम ( 1:2 ) 3 ग्राम/ कि.ग्रा. बीज दर से करें।
     
आई.पी. एम 
  1. प्रतिरोधक किस्में जैसे ए.एल.-1, जे.ए.-4, बी.डी.एन.-2, बिरसा अरहर -1, डी.एल.-82, एच. 76-11,76-44, 76-51,76-65, आई.सी.पी.-8863 ( मारूति ), -9145, पंत ए 3, आई.सी.पी.एल. 267, मुक्ता, प्रभात, शारदा, टी.टी.-5,6, सी-11, जे.के.एम. -7 इत्यादि का उपयोग करें।
  2. उन खेतों का चुनाव करें जहां पर पिछले तीन सालों में उकटा रोग का प्रकोप न हुआ हो।
  3. गर्मी में जुताई करें।
  4. पुराने फसल अवशेषों एवं रोगग्रस्त पौधे को नष्ट करें।
  5. रोग रहित खेतों से बीजों का चुनाव करें।
  6. अरहर को अन्तरवर्तीय फसल या मिश्रित फसल के रूप में ज्वार जैसे फसलों के साथ लें।
  7. तीन साल में अरहर को ज्वार, तम्बाखू, अरण्डी जैसे फसलों के साथ फसल चक्र अपनाए।
  8. उकटा रोग ग्रस्त पौधे को नष्ट करे या उन्हें जलाऊ लकड़ी के रूप में उपयोग करें।
  9. गर्मी में सुबह हल्की सिंचाई करके खेत को पॉलीथीन से ढक दें जिससे उष्मा के कारण खरपतवार नष्ट हो जाते है।

रोग फाईटोपथोरा अंगमारी रोग  
हिन्दी नाम फाईटोपथोरा अंगमारी रोग

कारक जीवाणु  फाईटोपथोरा स्पी.
लक्षण एवं क्षति 

-
नियंत्रण

  1. रेडोमिल एम.जेड. 3 ग्राम/लीटर की दर से बीज पर परत चढ़ायें।
  2. अंकुरण के 15 दिन पश्चात दो बार 15 दिन के अन्तर से रेडोमिल एम.जेड. का पत्तियों पर छिड़काव करें।
आई.पी. एम 
  1. प्रतिरोधक किस्में जैसे हरदा-41, हा. 4, आई.सी.पी.एल. 150, 288,304 बी.डी.एन. 2, के.पी.बी.आर.-80-1-4, 80-2-1, इत्यादि का उपयोग करें।
  2. उन खेतों का चुनाव करें जहां पर पिछले तीन सालों में ब्लाइट रोग का प्रकोप न हुआ हो।
  3. कूटरोपण पध्दति अपनाए।
  4. गर्मी में जुताई करें।
  5. गर्मी में सुबह हल्की सिंचाई करके खेत को पॉलीथीन से ढक दें जिससे उष्मा के कारण खरपतवार नष्ट हो जाते है।

रोग चुर्णित आसिता  
हिन्दी नाम चुर्णित आसिता

कारक जीवाणु  एरीसीफे स्पी
लक्षण एवं क्षति 

-
नियंत्रण

  1. घुलशी सल्फर 1 ग्राम /लीटर की दर से छिड़काव करें।
    या
    बेलीटोन 25 ई.सी. 0.03 प्रतिशत का छिड़काव करें।
     
आई.पी. एम 
  1. प्रतिरोधक किस्में जैसे आई.सी.पी. 9150 एवं 9177 इत्यादि का उपयोग करें।

रोग रस्ट या किट्ट  
हिन्दी नाम अरहर का गेरूआ रोग

कारक जीवाणु  यूरोमाइसिस स्पी.
लक्षण एवं क्षति 

-
नियंत्रण

  1. मेनेब 3 ग्राम /लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
आई.पी. एम 
  1. प्रतिरोधक किस्में जैसे ब्लेन्को, टोडो टेम्पो एवं नं. 17, का उपयोग करें।

रोग बांझपन रोग    
हिन्दी नाम बांझपन रोग

कारक जीवाणु  -
लक्षण एवं क्षति 

-
नियंत्रण

  1. 25 प्रतिशत /फ्यूराडान 3 जी. की परत बीजों पर चढ़ायें।
  2. 10 प्रतिशत एल्डीकार्ब 3 ग्राम/ कि.ग्रा. बीज की दर से उपयोग करें।
  3. एकारीसाइड या कीटनाशक जैसे मेटासाइटाक्स या केलथेन 0.1 प्रतिशत का छिड़काव करें।
आई.पी. एम 
  1. प्रतिरोधक किस्में जैसे बोगेश्वरी, बहार,डी.ए.-11, 13, आई.सी.पी.एल. 86,87,146,87051,8859, एम.ए. 166, बी.डी.एन. 1,2, जे.ए. -4, पी.डी.के. -10, रामपूर बहार का उपयोग करें।
  2. समय पर बोनी करें।
  3. कतार से कतार की दूरी 30 से 40 से.मी. रखें।
  4. प्रमाणित बीजों का उपयोग करें।
  5. यदि बीज उपचारित न हो तो इन्हें उपचारित करें।
  6. संवेदनशील क्षेत्रों में प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।
  7. खरपतवारों को नष्ट करें।
  8. सफेद मक्खी पर नियंत्रण करें।
M.P. Krishi
 
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