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फसल सिफारिशें |
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खरीफ फसल - मक्का
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बोनी
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बीज उपचार :-
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बीज उपचार बहुत महत्वपूर्ण है इससे मिट्टी एवं बीजों से जनित रोगों
से बचाव किया जा सकता है।
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बीज उपचार 3 ग्राम थाईरम या 3 ग्राम कैपटन या 3 ग्राम वेवीस्टीन
प्रति कि.ग्रा. बीज में करना चाहिए।
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इसके लिए उपरोक्त फंफूदनाशक में से किसी एक को छाया में बीजों के
साथ अच्छी तरह से शोधन के पहले मिलाना चाहिए।
बीज
शोधन :-
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बीजोप्जार के बाद बीज शोधन करना चाहिए।
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मक्का के बीजों को एजिक्टोवेक्टर या एजोस्पाइरीलम से शोधन करना
चाहिए।
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एक लीटर पानी में गुड़ या चावल के ग्रोयल का घोल बनाकर पांच
पेकैट ( 150 ग्राम प्रत्येक को मिला लें।
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उपरोक्त को 80 से 100 कि.ग्रा बीज पर छिड़काव करें एवं छाया में
सुखा लें। इसके पश्चात तुरन्त बोनी करें।
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शोधन किये बीजों को सूर्य के ताप से बचायें।
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5 ग्राम पी.एस.बी. प्रति कि.ग्रा बीज की दर मिलायें इससे आंशिक
रूप से स्फुर की मात्रा की पूर्ति की जा सकती है।
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बिहार के कुछ भागों में बीज का शोधन 5 प्रतिशत जलशक्ति से भी
किया जा सकता है।
बीज दर और
बोनी :-
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खरीफ मक्का उत्पादन के लिए बुआई का समय वर्षा के आगमन पर या कम
वर्षा वाले इलाके में वर्षा आगमन के पांच दिन पूर्व कना चाहिए।
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सिंचाई उपलब्ध होने पर वर्षा शुरू होने के 10 से 15 दिन पूर्व बुआई
कर देना चाहिए।
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संकर किस्मों के लिए 16 से 17 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर बीज दर होना
चाहिए।
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मध्यम अवधि वाली संकुलित किस्मों के लिए 18 कि.ग्रा. प्रति
हेक्टेयर बीज दर होना चाहिए।
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शीघ्र पकने वाली संकुलित किस्मों के लिए 20 कि.ग्रा. प्रति
हेक्टेयर बीज दर होना चाहिए।
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पौध संख्या 70000 से 80000 प्रति हेक्टेयर होना चाहिए।
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बीज को जमीन से 5 से.मी. गहराई पर लगाना चाहिए।
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पौधे से पौधे की दूरी 20 से 25 से.मी. होनी चाहिए।
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कतार की कतार से दूरी 60 से 70 से.मी. होनी चाहिए।
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समतल भूमि में कतारों में सरता द्वारा बोये।
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अति वर्षा वाले इलाकों में घाड़े बनाकर घाड़े के तल पर खाद डाले और 1
या 2 इंच की ऊंचाई पर बोये।
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M.P. Krishi
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