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फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - मक्का

रोग प्रबंधन -मक्का


रोग

चारकोल रॉट

हिन्दी नाम

चारकोल रॉट

 

 
कारक जीवाणु

राईज़ोक्टोनिया बटाटीकोला

नियंत्रण

  1. 3 ग्राम कार्बन्डाजिम या थाईरम से बीज उपचारित करने से रोग का प्रभावी ढंग से नियंत्रण किया जा सकता

लक्षण एवं क्षति  

  1. अंकुरित पौधे या परिपक्वता को प्रात्त करने वाले पौधे अक्सर इस रोग से ग्रसित होते है।

  2. बीज गहरे भूरे से काले रंग के हो जाते है।

  3.  हाईपोकोटाइल क्षेत्र में अंकुरित पौधे लाल भूरे में बदल जाते है।

  4.  तने के निचले हिस्से में संक्रमण फैलता है जहां स्लेटी धारियां तने की सतह पर बनती है,जिससे समय से पहले पकना, झड़ना और टुट जाता है।

  5.  सूखे की स्थिति में अंकुरित पौधे सूख जाते है और पौधा मर जाता है।

आई.पी. एम
  1. प्रतिरोधक किस्में जैसे डी एच एम 103,105 गंगा सफेद 2 को उगाना चाहिए।
    2. खेत की साफ सफाई नियमित रूप से करें।
    3. फसल चक्र अपनाए।
    4. फूल आने के समय पानी की मात्रा पर्याप्त रखने से रोग का आक्रमण कम किया जा सकता है।
    5. बीज दर अत्याधिक न रखें।
    6. पौध विकास को बढ़ावा देने के लिए उर्वरकों और पोषक तत्वों का उपयोग करें।
    7. मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए सिंचाई करें या खेत में बोवाई के 3-4 सप्ताह पहले खेत में पानी भर दें। 


रोग

मेज़ लीफ ब्लाइट

 

 
हिन्दी नाम

डेचिसलेरा पर्ण झुलसन

कारक जीवाणु 

डेचिसलेरा विक्टोरिये (कॉकलिबोलस विक्टोरिये)

लक्षण एवं क्षति 

  1. छोटे हीरे के आकार के धब्बे पत्तियों पर उभरते है और समय के साथ बढ़ जाते है।

  2.  साथ वाली शिराओं के कारण धब्बे की वृध्दि रूक जाती है तथा वो आयताकार हो जाते है।

  3.  ये लाल भूरे रंग के होते है और इनकी गहरी भूरी किनारे होती है।

नियंत्रण

  1. 2.5 ग्राम / लीटर मेनकोजेब का उपयोग करें।

आई.पी. एम
  1. खरपतवार और फसलों के अवशेषों को नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3.  प्रतिरोधक संकर किस्मों का उपयोग करें।

  4.  फसल चक्र अपनाए ताकि रोग का लगातार आक्रमण रोका जा सके। 


रोग

टूरसिकम लीफ स्पॉट

 

हिन्दी नाम

टूरसिकम पर्ण झुलसन

कारक जीवाणु  

डेचिसलेरा टूरसिका(ट्राइकोमेटास्फीरिया टूरसिका)

लक्षण एवं क्षति 

  1. इस रोग में पत्तियों पर लम्बाई में भूरे धब्बे पाये जाते है।

  2.  इस रोग के प्रांरभिक लक्षण निचली पत्तियों पर दिखाई देते है जो बाद में नम मौसम में ऊपरी पत्तियों पर भी पाये जाते है।

नियंत्रण

  1. 2.5 ग्राम /लीटर मेनकोज़ेब का छिड़काव करें।

आई.पी. एम
  1. प्रतिरोधक संकर उगाए।

  2.  फसल चक्र अपनाए।

  3.  खेत में साफ सफाई रखें।


रोग

डाऊनी मिल्डयू

 
हिन्दी नाम

मृदुरोमिल आसिता

 

 
कारक जीवाणु  

परनोस्क्लीरोस्पोरा सोरगी

लक्षण एवं क्षति 

  1. रोग बीज और मृदा से फैलता है।

  2. सर्वप्रथम ऊपरी पत्तियां मुड़ जाती है।

  3.  निचली पत्तियां पर लम्बे व 3 मि.मी. धारियां बनते है । बाद में सफेद रंग की फंफूद दिखाई पड़ती है।

  4.  अधिक प्रकोप से उपज में 20 से 60 प्रतिशत तक की कमी हो जाती है।

नियंत्रण

  1. 4 ग्राम/कि.ग्रा बीज की दर से मेटेलेक्साइल द्वारा बीज को उपचारित करें।

  2.  2.5 ग्राम/लीटर मेनकोजेब का छिड़काव करें।

आई.पी. एम
  1. गर्मी में खेत तैयारी के पूर्व फसल अवशेषों को नष्ट करें।

  2.  प्रतिरोधक संकर उगाए।

  3.  परपोषी पौधों को नष्ट करे।

  4.  गहरी जुताई करे। 


रोग

सोरगम डाऊनी मिल्डयू

 
हिन्दी नाम

मृदुरोमिल आसिता

  

कारक जीवाणु  

परनोस्क्लीरोस्पोरा सोरगी

लक्षण एवं क्षति 

  1. रोग से प्रभावित पौधों की पत्तियां हल्के पीले रंग की होती है और उनपर सूक्ष्म मृदुरोमिल बृध्दि दिखाई देती है।

  2.  पौधे कमजोर हो जाते है और 5-6 सप्ताह बाद पत्तियों पर श्वेत धारियां दिखाई देती है।

नियंत्रण

  1. 4 ग्राम/ कि.ग्रा बीज की दर से मेटेलेक्साइल द्वारा बीज को उपचारित करें।

  2.  2.5 ग्राम /लीटर मेनकोजेब का छिड़काव करें।

आई.पी. एम
  1. गर्मी में खेत तैयारी के पूर्व फसल अवशेषों को नष्ट करें।

  2.  प्रतिरोधक संकर उगाए।

  3.  परपोषी पौधों को नष्ट करें।

  4.  गहरी जुताई करें।


रोग

ब्राऊन स्ट्राइप डाऊनी मिल्डयू

 
हिन्दी नाम

मृदुरोमिल

 

 
कारक जीवाणु  

लक्षण एवं क्षति 

  1. धब्बे लाल बेंगनी हो जाते है और आकार में बढ़ जाती है।

  2.  धब्बे छोटे हरिमाहीन धारियां बनती है जो पत्तियों की शिराओं तक बढ़ती है।

  3.  पत्तियां झड़ती नहीं है पर फूल आने के पहले प्रभावित पौधे मर जाते है।
    नियंत्रण 1. 4 ग्राम/ कि.ग्रा बीज की दर से मेटेलेक्साइल द्वारा बीज को उपचारित करें।

नियंत्रण

  1. 4 ग्राम/ कि.ग्रा बीज की दर से मेटेलेक्साइल द्वारा बीज को उपचारित करें।

  2. 2.5 ग्राम /लीटर मेनकोजेब का छिड़काव करें।

आई.पी. एम
  1. गर्मी में खेत तैयारी के पूर्व फसल अवशेषों को नष्ट करें।

  2.  प्रतिरोधक संकर उगाए।

  3.  परपोषी पौधों को नष्ट करें।

  4.  गहरी जुताई करें।


रोग

शुगरकेन डाऊनी मिल्डयू

 
हिन्दी नाम

मृदुरोमिल

 

 
कारक जीवाणु  

परनोस्क्लीरोस्पोरा सोरगी

लक्षण एवं क्षति 

  1. प्रांरभ में धब्बे छोटे गोल और हरिमाहीन होते है।

  2.  पुरानी पत्तियों पर पीले से सफेद धारियां दिखाई पड़ती है।

नियंत्रण

 

  1. 4 ग्राम/कि.ग्रा बीज की दर से मेटेलेक्साइल द्वारा बीज को उपचारित करें।

  2.  2.5 ग्राम /लीटर मेनकोजेब का छिड़काव करें।

आई.पी. एम
  1.  गर्मी में खेत तैयारी के पूर्व फसल अवशेषों को नष्ट करें।

  2.  प्रतिरोधक संकर उगाए।

  3.  परपोषी पौधों को नष्ट करें।

  4.  गहरी जुताई करें।


रोग

कॉमन रस्टू

 
हिन्दी नाम

गेरूआ रोग

 

 
कारक जीवाणु  

पूसीनिया मेडिस

लक्षण एवं क्षति 

  1. रोग में पत्तियों पर चाकलेटी रंग के उभरे हुए से दिखाई पड़ते है जिन्हें हाथ लगाने पर हाथ पर चाकलेटी रंग का पाऊडर चिपकता है।

  2.  पत्ते बाद में पीले पड़कर गिर जाते है।

  3.  इस रोग में पत्तियों पर चाकलेटी रंग के उभरे हुए से दिखाई पड़ते है जिन्हें हाथ लगाने पर हाथ पर चाकलेटी रंग का पाऊडर चिपकता है।

  4.  पत्ते बाद में पीले पड़कर गिर जाते है।

नियंत्रण

 

  1. 4 ग्राम/कि.ग्रा बीज की दर से मेटेलेक्साइल द्वारा बीज को उपचारित करें।

  2.  2.5 ग्राम /लीटर मेनकोजेब का छिड़काव करें।

आई.पी. एम
  1. गर्मी में खेत तैयारी के पूर्व फसल अवशेषों को नष्ट करें।

  2.  प्रतिरोधक संकर उगाए।

  3.  परपोषी पौधों को नष्ट करें।

  4.  गहरी जुताई करें। 


रोग

ब्राऊन स्पॉट

 
हिन्दी नाम

भूरा धब्बा

 

 
कारक जीवाणु  

-

लक्षण एवं क्षति 

  1. पत्तियों और पर्णच्छद पर गोल अण्डाकार छोटे और भूरे भूरे धब्बे बनते है जो बाद में गहरे भूरे होकर आपस में मिलकर बड़े धब्बे बनाते है जिसमें पत्तियां झुलस जाती है तथा कभी कभी पौधे सूख कर मर जाते है।

नियंत्रण

 

  1. भूरा धब्बा के लिए कोई विशेष नियंत्रण अनुमोदित नहीं है।

आई.पी. एम
  1. गर्मी में खेत तैयारी के पूर्व फसल अवशेषों को नष्ट करें।

  2.  प्रतिरोधक संकर उगाए।

  3.  परपोषी पौधों को नष्ट करें।

  4.  गहरी जुताई करें।

  5.  फसल चक्र अपनाए।


रोग

बेनडेड लीफ और शिथ ब्लाइट

 
हिन्दी नाम

धारीदार पर्ण और शिथ झुलसन

 

 
कारक जीवाणु  

राइजाटोनिया सोलानी

लक्षण एवं क्षति 

  1. बड़े रंगहीन क्षेत्र एकान्तर धारीयां पत्तियों पर दिखाई पड़ती है।

  2.  अधिक संक्रमण पर पर्णच्छद और पत्तियों पर चकत्ते उभर आते है।

  3.  अनुकूल स्थितियों में लक्षण रेशे, भूसे एवं बीजों तक पहुंचता है।

  4.  लक्षण डन्ठल पर भी दिखाई देते है और संक्रमित स्थान से टूट जाते है।

नियंत्रण

 

  1. 1.5 ग्राम/लीटर की दर से कार्बन्डाजिम या प्रोपीकोनाज़ोल का छिड़काव करें।

आई.पी. एम
  1. खेत में साफ सफाई रखें।

  2.  फसल अवशेषों को नष्ट करें।


रोग

सीडलिंग ब्लाइट, रूट और स्टाक रॉट 

 
हिन्दी नाम

बीज एवं पौध गलन

 

 
कारक जीवाणु  

-

लक्षण एवं क्षति 

  1. छोटी जड़ों पर पानीदार धब्बे दिखाई पड़ते है।

  2.  सड़न मुख्य जड़ों पर और शीर्ष तन्तूओं तक फैल जाती है।

  3.  रोग केवल मिट्टी से सटी हुई निचली गांठों पर होता है ।

  4.  भूरे अण्डाकार धब्बे संक्रमित गांठों पर दिखाई देते है और पौधा मुड़कर टूट जाता है।

नियंत्रण

 

  1. छोटी जड़ों पर पानीदार धब्बे दिखाई पड़ते है।

  2.  सड़न मुख्य जड़ों पर और शीर्ष तन्तूओं तक फैल जाती है।

  3.  रोग केवल मिट्टी से सटी हुई निचली गांठों पर होता है ।

  4.  भूरे अण्डाकार धब्बे संक्रमित गांठों पर दिखाई देते है और पौधा मुड़कर टूट जाता है।

आई.पी. एम
  1. खेत में साफ सफाई रखें।

  2.  जल निकास की व्यवस्था करें। 


रोग

हेड स्मट ऑफ मेज़

 
हिन्दी नाम

कंडवा रोग

 

 
कारक जीवाणु  

ओसटीलेगो मेडिस

लक्षण एवं क्षति 

  1. यह रोग बीज जनित है।

  2.  इस रोग में समूचा पुष्पक्रम बीजाणु पुंज में बदल जाता है।

  3.  बाद की अवस्था में बीजाणु अनावृत हो जाते ह।

  4.  काले रेशे का एक जाल भुट्टे से चिपका रहता है।

नियंत्रण

 

  1. 3 ग्राम केप्टॉन या थाईरम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से बीज उपचारित करें।

आई.पी. एम
  1. फसल चक्र अपनाए।

  2.  प्रमाणित और स्वस्थ बीज बोयें।

  3.  खेत में साफ सफाई रखें। 


रोग

ब्लेक बंडल

 
हिन्दी नाम

-

 

 
कारक जीवाणु  

-  

लक्षण एवं क्षति 

  1. पत्तियां और डन्ठल बेंगनी रंग के हो जाते है।

  2.  पौधे के वेस्कूलर बंडल काले पड़ जाते है।

  3.  इस रोग के कारक मिट्टी में लम्बे समय तक रहते है और अगर मिट्टी में पानी की कमी बाद की या फूल आने की अवस्था में होती है तब इस रोग की संभावना बढ़ जाती है।

नियंत्रण

 

  1. 3 ग्राम केप्टॉन या थाईरम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से बीज उपचारित करें।

आई.पी. एम
  1. डी.एच.एम. 103, डी.एच.एम. 105 और गंगा सफेद जैसी प्रतिरोधक किस्में बोयें।

  2.  फसल चक्र अपनाए।

  3.  खेत में नियमित रूप से साफ सफाई करें। 


रोग

कॉमन स्मट

 
हिन्दी नाम

कंडवा रोग

 

 
कारक जीवाणु  

लक्षण एवं क्षति 

  1. मक्का के पौधे के शीर्ष भागों में खासकर नये पौधों में रोग के संक्रमण की संभावना ज्यादा रहती है।

नियंत्रण

 

  1. 3 ग्राम केप्टॉन या थाईरम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से बीज उपचारित करें।

आई.पी. एम
  1. फसल चक्र अपनाए।

  2.  प्रमाणित और स्वस्थ बीज बोयें।

  3.  खेत में साफ सफाई रखें।


रोग

मेंज डॉफ मोजेक वायरस

 
हिन्दी नाम

एम.डी.एम.वी.

 

 
कारक जीवाणु  

मोजेक वायरस

लक्षण एवं क्षति 

  1. नई पत्तियां इस रोग के आक्रमण के प्रति संवेदनशील होती है।

  2. हल्के अनियमित या गहरे हरे धब्बे पत्तियों पर दिखाई पड़ते है।

  3.  पौधे के विकास पर प्रभाव पड़ता है और एकाधिक बाले और बहुत कम दानों का भराव होता है।

नियंत्रण

 

  1. 1.5 मि.ली मोनोक्रोटोफॉस या 2 मि.ली. डाईमेथोएट प्रति लीटर की दर से कीट वायरस का नियंत्रण करें।

आई.पी. एम
  1. जॉनसन घास को नष्ट करें क्योंकि यह परपोषी पौधा होता है।

  2.  खेत की समय समय पर सफाई करें।


रोग

मेंज मोजेक वायरस  

 
हिन्दी नाम

विषाणु रोग

 

 
कारक जीवाणु  

एम.एम.वी.

लक्षण एवं क्षति 

  1. यह मक्के में अधिकतर होने वाला रोग है।

  2.  प्रांरभ में रंगहीन धब्बे बनते है, तत्पश्चात छोटी छोटी रेखायें उभर आती है।

  3.  यदि संक्रमण रहता है तो पूरी पत्तियां प्रभावित होती है और अधिक आक्रमण पर मर जाती है।

  4.  नया विकास गुच्छे के रूप में होता है।

नियंत्रण

 

  1. 1.5 मि.ली मोनोक्रोटोफॉस या 2 मि.ली. डाईमेथोएट प्रति लीटर की दर से कीट वायरस का नियंत्रण करें।

आई.पी. एम
  1. समय पर बोनी करें।

  2.  खेत में साफ सफाई रखें।

  3.  परपोषी पौधों को नष्ट करें। 


रोग

सीडलिंग ब्लाइट

 
हिन्दी नाम

 

कारक जीवाणु  

राईजोटोनिया सोलानी

लक्षण एवं क्षति 

  1. उच्च तापमान और नमी युक्त वातावरण इस रोग के फैलने के लिए अनुकूल है।

  2.  ये रोग नये पौधे में दिखाई पड़ता है। जिसके फलस्वरूप सीडलिंग सूखने लगता है और अकुंरण अच्छा रहता है।

  3.  पुरानी जड़ों और शीर्ष तन्तूओं गुच्छेदार हो जाता है।

  4.  मिट्टी को छूती गांठों में यह रोग ज्यादा फैलता है।

  5.  आक्रमित भाग में फंफूद उगने लगती है और इसी से अक्सर पौधा टूटता है।

  6.  फंफूद मिट्टी और पौधे के अवशेषों में रहता है।

नियंत्रण

 

  1. 3 प्रतिशत थाइरम या केप्टॉन से बीज उपचार करें।

आई.पी. एम
  1. गंगा सफेद 2 और डी.एच.एम. 103 जैसी प्रतिरोधक किस्मों को संवेदनशील क्षेत्रों में उगाए।

  2.  फसल चक्र को अपनाए।

  3.  खेत में नियमित रूप से साफ सफाई करें।

  4.  जल निकास की अच्छी व्यवस्था करें। 

M.P. Krishi
 
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