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फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - मूंगफली

रोग प्रबंधन - मूंगफली


रोग लीफ स्पाट
हिन्दी नाम अगेती पत्ती धब्बा
कारक जीवाणु फेसीओसारीउपसिस फरसनेटम
लक्षण एवं क्षति
  1. बोनी के एक माह बाद संक्रमण आरंभ होता है।
  2. पत्तियों पर छोटे धब्बे दिखाई पड़ते है जो बढ़कर भूरे या काले होकर पत्ती की ऊपरी सतह पर दिखाई पड़ते है।
  3. पत्तियों की निचली सतह पर हल्के भूरी हो जाती है।
  4. पत्ती के डन्ठल और तने पर भी धब्बे दिखाई पड़ते है।
  5. अधिक संक्रमण पर धब्बे फैल जाते है और फसल पकने जैसी दिखाई पड़ती है।
नियंत्रण

  1. 0.1 प्रतिशत कार्बडजिम और 0.1 प्रतिशत मेनकोजेब और 0.2 प्रतिशत क्लोरोथालोनिल का छिड़काव करें।
आई.पी. एम
  1. प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।
  2. पौधे के अवशेषों को जलाकर नष्ट करें।
  3. फसल चक्र अपनाए।

रोग लेट लीफ स्पाट  

हिन्दी नाम पिछेती पत्ती धब्बा
कारक जीवाणु  सरकोस्पोरा अराचीडीकोला
लक्षण एवं क्षति
  1. 8 खरीफ में बोनी के 55 से 57 के बाद संक्रमण शुरू होता है। और रबी में बोनी के 42 से 46 दिन बाद संक्रमण शुरू होता है।
  2. पत्ती के निचले सतह पर सफेद काले गोल धब्बे दिखाई पड़ते है।
  3. धब्बे दिखने में सख्त होते है और फैलकर पकने से दिखाई पड़ते है।
  4. पत्ती के करीब 20 घंटे नमी रहने से रोग का आक्रमण करता है।
नियंत्रण

  1. 0.1 प्रतिशत कार्बडजिम और 0.1 प्रतिशत मेनकोजेब और 0.2 प्रतिशत क्लोरोथालोनिल का छिड़काव करें।
आई.पी. एम
  1. प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।
  2. पौधे के अवशेषों को जलाकर नष्ट करें।
  3. फसल चक्र अपनाए।

रोग क्राऊन रॉट  

हिन्दी नाम शी्र्श विगलन
कारक जीवाणु  एसपरगिलस नाइजर
लक्षण एवं क्षति
  1. गलने से बीज मर जाते है।
  2. हाईपोकोटाइल के सड़ने से पौधे टुट जाते है और मर जाते है।
  3. कॉलर क्षेत्र गहरे भूरे रंग के हो जाते है।
  4. वयस्क पौधे में मिट्टी मे नीचे तने पर बड़े धब्बे हो जाते है जो ऊपर की ओर शाखाओं की तरफ फैलते है और पौधे अकड़ जाते है।
  5. फंफूद पकी फलियों पर जम जाती है और उनमें काले चिपकने वाले धब्बे हो जाते है।
नियंत्रण

  1. 4 ग्राम ट्राईकोडर्मा या 3 ग्राम थाइरम से बीज उपचारित करें।
आई.पी. एम
  1. प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।
  2. पौधे के अवशेषों को जलाकर नष्ट करें।
  3. फसल चक्र अपनाए।

रोग रस्ट  
हिन्दी नाम किट्ट
कारक जीवाणु 

पुसिनिया एराचिडस
लक्षण एवं क्षति
  1. पत्ती की निचली सतह पर गोल नारंगी रंग के फफोले दिखाई पड़ते है।
  2. जब ये फफोले फूटते है तो लाल भूरे बीजाणु दिखाई पड़ते है।
  3. पत्तियों की ऊपरी सतह पर भी फफोले हो सकते है।
नियंत्रण

  1. 0.2 प्रतिशत क्लोरोथाइनोल या 0.2 प्रतिशत मेनकोजेब या 0.1 प्रतिशत ट्राइडीमोरफ का छिड़काव करें।
  2. 5 प्रतिशत नीम आधारित बीज चूर्ण का छिड़काव करें।
आई.पी. एम
  1. फसल चक्र अपनाए।
  2. स्वच्छ खेती करें।

रोग स्टेम रॉट  
हिन्दी नाम तना सड़न   
कारक जीवाणु  स्केलेरोशियम रॉलफसी
लक्षण एवं क्षति
  1. पौधे के तन्तूओं पर सफेद फंफूद विकसित हो जाती है विशेषकर तने पर।
  2. पौधे का तल पीला हो जाता है और अकड़ जाते है।
  3. मिट्टी में तने के संक्रमित क्षेत्र में सफेद माइसिलियम विकसित हो जाते है और तना सुकुड़ जाता है।
  4. संक्रमित तन्तूओं में सफेद स्कोलेरेशिया हो जाते है।
  5. संक्रमित फलियों के बीज नीले स्टेली रंग के हो जाते है।
नियंत्रण

  1. 4 ग्राम ट्राईकोडर्मा या 3 ग्राम थाइरम से बीज उपचारित करें।
  2. बोनी के पहले 2 कि.ग्रा. टी. विरिडी और 50 कि.ग्रा. सड़ी गली खाद डाले।
     
आई.पी. एम
  1. गहरी जुताई करें जिससे सतह पर रहने वाले हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाए।

रोग बड निक्रसिस  
हिन्दी नाम बड निक्रसिस 

कारक जीवाणु  पीनट बड निक्रसिस वायरस
लक्षण एवं क्षति
  1. 8 नई पत्तियों पर हरिमाहीन धब्बे और ऊतक चक्र विकसित हो जाते है।
    जब तापमान अधिक होता है तो अंतस्थ कली ऊतकक्षयी हो जाती है।
    जब पौधे बढ़ता है तो वो अकड़ जाता है जिसमें छोटी अंतपर्वसंधि रहती है।
    थीप्स से यह वायरस फैलता हैं।
     
नियंत्रण

  1.  1.6 मि.ली./लीटर मोनोक्रोटोफॉस या 2 मि.ली. #लीटर डाइमेथोएट का छिड़काव करें।
आई.पी. एम
  1.  प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।
  2. पौधों का धनत्व बढ़ायें, जल्दी बोनी करें।
  3. पर्ल मिलेट के साथ अन्तवर्तीय फसल के रूप में उगाए। 

रोग कालाहस्ती मलाडी  
हिन्दी नाम कालाहस्ती मलाडी

कारक जीवाणु  -
लक्षण एवं क्षति
  1. 8 खेत में संक्रमक पौधे छोटे छोटे समूह में दिखाई देते है। ये पौधे सामान्य पौधों से अधिक हरिमा लिए होते है।
  2. नई फलियों पर भूरे धब्बे दिखाई देते है।
  3. रोग की अवस्था में फल्ली का कवज पूर्णत:काला पड़ जाता है।
     
नियंत्रण

  1. बोनी के 25-30 दिन बाद 4 कि.ग्रा. कार्बाफ्यूरान ए.आई 133 कि.ग्रा.#हे का सिंचित पानी के साथ छिड़काव करें।
आई.पी. एम
  1. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
M.P. Krishi
 
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