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मुद्रा 2015-16
फसल सिफारिशें

ख़रीफ फसल - सोयाबीन

 कीट प्रबंधन - सोयबीन


 

मेलेनाग्रोमाईज़ा सोजे

लेप्रोसिमा इडिकेटा

डेक्टीस टेकसान्स टेकसान्स

स्पोडोपेटरा लिटुरा

एफिड

हेलीकोवरपा अरमीजेरा

चक्र भृंग

केलिओथिप्स इन्डीकस

हाईलेमया सीलीकरुरा

एग्रोटीस इपसलन

सिनोरेन

नेजेरा विरीडुला

मोसीस अनडेटा

स्पोडॉपटेरा इज़ीगुआ

स्पोलोसोमा ओलीक्वा

एमसेक्टा मूराई

बरमरशिया टेबाकी

इमपोस्का इन्डीकस

ग्राइलस डोमेसटीकेटा / होमीयोग्राइलस

डाईक्रेशिया ओरीचेलशिया, क्राईसोडिएकसीस एक्युटा


 

कीट

  मेलेनाग्रोमाईज़ा सोजे

प्रचलित नाम

  तना मक्खी

क्षति

  1. यह फोटो सोयाबीन की तना मक्खी की है।

  2. सोयाबीन का प्रमुख कीट है और 20-30 प्रतिशत तक हानि पहुंचाता है।

  3. यह कीट पत्तों पर अंडे देता है।

  4. अंडे से मेंगट निकलने पर वह सबसे निकटतम कोशिका को छेदती है।

  5. मेंगट उसके बाद तने को छेदती है।

  6. यदि संक्रमित तने को खोला जाए तो उसमें टेढ़ी-मेढ़ी लाल सुंरगे, मेंगट, प्यूपा देखे जा सकते है।

  7. मेंगट तने की बाहरी परत पर पलते है और जड़ों तक को खा सकते है जिससे पौधा मर जाता है।

  8. फूल और फल्ली बनने की अवस्था में आक्रमण करता है।

आई.पी. एम. 

  1. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  2. प्रतिरोधक किस्में जैसे जे.एस-335, पी.के. 262, एन.आर.सी. 12, एम.ऐ.सी.एस. 124 को उगायें।

  3. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  4. अनुमोदित बीज दर ही अपनायें।

  5. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  6. मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  7. खरपतवार नियंत्रण करें।

  8. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  9. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

  10. रसायनिक नियंत्रण हेतू खंड देखे।

  11. फसल चक्र अपनाइये।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक का उपयोग करें-:

  2. बोनी से पहले कार्बोफूरान 3 जी. को 30 कि.ग्रा / हे की दर से या क्षारीय फोरेट 10 जी. की दर से 10 कि.ग्रा /हे का भुरकाव करे।

  3. आक्सीमीटन मिथाईल 25 प्रतिशत ई.सी. 500 मि.लि. /हे की दर से 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

  4. अंकुरण के दो सप्ताह के बाद डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ई.सी. 750 मि.लि./हे 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

  5. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से छिड़काव करें।

  6. मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

  7. ट्राईजोफॉस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

  8. 25 ई.सी. क्वीनालफॉस 1000 मि.ली./हे की दर से छिड़काव करें।


 

कीट

  लेप्रोसिमा इडिकेटा

प्रचलित नाम

   पत्ता मोडक ( लीफ फोल्डर )

क्षति

  1. लार्वा पहले पत्तियों को खाती है।

  2. ये मिसोफाइल को खाते है।

  3. ये परतों के अन्दर रहते है।

  4. संक्रमण अधिक होने पर दूर से देखने पर खेत जले हुए से प्रतीत होते हैं।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में जैसे एच. आर. एम. एस. ओ. 1564 का उपयोग करें।

  4. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  5. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  6. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  7. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए अगर मिट्टी में पोटॉश की कमी हो तो।

  8. खरपतवार नियंत्रण करें।

  9. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  10. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

  11. रसायनिक नियंत्रण हेतू खंड देखे।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक का उपयोग करें-:

  2. बोनी से पहले कार्बोफूरान 3 जी. को 30 कि.ग्रा / हे की दर से या क्षारीय फोरेट 10 जी. की दर से 10 कि.ग्रा /हे का भुरकाव करे।

  3. आक्सीमीटन मिथाईल 25 प्रतिशत ई.सी. 500 मि.लि. /हे की दर से 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

  4. अंकुरण के दो सप्ताह के बाद डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ई.सी. 750 मि.लि./हे 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

  5. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से छिड़काव करें।

  6. मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

  7. ट्राईजोफॉस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

  8. 25 ई.सी. क्वीनालफॉस 1000 मि.ली./हे की दर से छिड़काव करें।


 

कीट

 डेक्टीस टेकसान्स टेकसान्स

प्रचलित नाम

 तना छेदक 

क्षति

  1. इल्ली ज्यादा क्षति पहुँचाते है।

  2. सोयाबीन की शीध पकने वाली किस्में इस कीट से ज्यादा प्रभावित होती है।

  3. लार्वा तने के बीच में सुंरग बना कर तने को खा लेता है।

  4. पकने की अवस्था में पौधों को तल से भी काटते है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में जैसे एच. आर. एम. एस. ओ. 1564 का उपयोग करें।

  4. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  5. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  6. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  7. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए अगर मिट्टी में पोटॉश की कमी हो तो।

  8. खरपतवार नियंत्रण करें।

  9. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  10. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में
    लगाए।

  11. रसायनिक नियंत्रण हेतू खंड देखे।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।
     

  2. निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में उपयोग करें-:
     

  3. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से छिड़काव करें।

  4. मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  5. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  6. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  7. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।


 

कीट

  स्पोडोपेटरा लिटुरा

प्रचलित नाम

  तम्बाखू इल्ली

क्षति

  1. इल्ली अवस्था में अधिक क्षतिदायक है।

  2. फूल आने के पहले यह इल्ली आक्रमण करती है।

  3. तरुणावस्था की इल्लियाँ समूह में पत्तियों के हरे भाग को खाती है और बड़ी होने पर पूरी पत्तियाँ खाने लगती है या उन पर बड़े छेद बना देती है।

  4. खाई हुई पत्तियाँ सफेद पीले जाल की तरह दिखती है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. रसायनिक नियंत्रण आर्थिक देहलीस्तर 10 लार्वा / मीटर लम्बाई होने पर ही करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में जैसे जे.एस.90-41, एच.आइ.एम.एस.ओ.1564 का उपयोग करें।

  4. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  5. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  6. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  7. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  8. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए अगर मिट्टी में पोटॉश की कमी हो तो।

  9. खरपतवार नियंत्रण करें।

  10. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि से बचाव करना चाहिए।

  11. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

  12. रसायनिक नियंत्रण हेतू खंड़ देखे।

  13. प्रकाश और फेरामोन फन्दों का उपयोग करे।

  14. वनस्पति नियंत्रण के लिए एन.पी. वायरस 250 एल.ई. 500 मि.लि पानी के साथ छिड़काव करे।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में उपयोग करें-:

  1. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से छिड़काव करें।

  2. मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  3. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  4. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  5. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।


 

कीट

 एफिड 

प्रचलित नाम

 माहू 

क्षति

  1. यह फोटो माहू कीट का है

  2. वयस्क अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाते है।

  3. एफिड रस चूसने वाले कीट है।

  4. वयस्क , तने, पत्ती, और फल्ली का रस चूसकर उपज में कमी कर देते है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. बोनी उचित समय पर करें।

  4. समय पर बोनी से कीट का आक्रमण कम होता है।

  5. प्रतिरोधक किस्में जैसे जे.एस.335,जे.एस. 71-05, जे.एस. 88-66 का उपयोग करें।

  6. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  7. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  8. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  9. मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  10. खरपतवार नियंत्रण करें।

  11. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  12. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
    रसायनिक नियंत्रण हेतू खंड़ देखे।

  13. प्रकाश और फेरामोन फन्दों का उपयोग करे।

  14. बीज उपचार के लिए 70 डब्लू एस थाईमेथाज़ान 3 ग्राम /कि.ग्रा की दर से करे।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में उपयोग करें-:

  1. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से

  2. मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  3. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  4. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  5. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।

  6. अंकुरण के एक सप्ताह के बाद थाईमेथाज़ान25 डब्लू एस 100 ग्राम/हे का छिड़काव करे।


 

कीट

  हेलीकोवरपा अरमीजेरा

प्रचलित नाम

  चने का फल्ली छेदक कीट

क्षति

  1. यह फोटो चने की फल्ली छेदक कीट का है।

  2. इल्ली एवं लार्वा अवस्था में सबसे ज्यादा क्षति पंहुचाते है।

  3. सामान्यत: कीट का आक्रमण अगस्त माह में होता है।

  4. यह पत्तियों का भक्षक है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  4. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  5. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  6. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  7. मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  8. खरपतवार नियंत्रण करें।

  9. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  10. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

  11. रसायनिक नियंत्रण हेतू खंड़ देखे।

  12. प्रकाश और फेरामोन फन्दों का उपयोग करें।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

  2. फल्ली छेदक कीट के लिए आर्थिक देहली स्तर 2 लार्वा / मीटर लम्बाई पुष्पावस्था एवं फल्ली बनने की अवस्था में है।

      निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में उपयोग करें-:

  1. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500मि.लि/हे की दर से

  2. मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  3. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  4. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  5. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।

  6. यदि कीट का आक्रमण जारी रहे तो छिड़काव 15-20 के बाद करे।


 

कीट

  चक्र भृंग

प्रचलित नाम

  ओबरिया, गर्डल बीटल 

क्षति

  1. यह फोटो चक्र भृंग कीट का है।

  2. इल्ली एवं लार्वा अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाते है।

  3. प्राय: कीट का आक्रमण जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त के पहले पखवाड़े में होता है।

  4. वयस्क मादा तने या टहनियों पर दो रिंग बनाती है। रिंग में 3 छोटे छेद बनाकर तने के बीच में पीले अंडे देती है। अंडे से इल्ली निकलने पर वह तने को अंदर से खाती है जिससे तना व टहनियां मुरझाकर सूख जाती है।

  5. पौधा भूमि से 15 से 20 से.मी. उपर टुट जाता है।

आई.पी. एम. 

  1. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  2. प्रतिरोधक किस्मे जैसे जे.एस. 71 05, पी.के.1162, जे.एस.335 का उपयोग करें।

  3. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  4. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  5. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  6. मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  7. खरपतवार नियंत्रण करें।

  8. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  9. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

  10. खेत एवं आसपास के क्षेत्र में खरपतवार नियंत्रण करें।

  11. लाइट ट्रेप का उपयोग करें।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।
     

  2. 10 जी. फोरेट 10 कि.ग्रा./हे बोनी के पहले उपयोग कों।

   निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

  1. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से छिड़काव करें।

  2. मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  3. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  4. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  5. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का छिड़काव करें।


 

कीट

 ग्राइलस डोमेसटीकेटा / होमीयोग्राइलस

प्रचलित नाम

 काले झिंगुर 

क्षति

  1. यह फोटो काले झिंगुर का है

  2. वयस्क अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाते है।

  3. जुलाई अगस्त में आक्रमण करते है।

  4. ज्यादातर रात में आक्रमण करते है और दिन में छिप जाते है।

  5. काले वयस्क भृंग बीज पत्रों को खाते है और झिंगुर पौधे को ऊपर से खाते है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  4. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  5. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  6. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  7. मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  8. खरपतवार नियंत्रण करें।

  9. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  10. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में
    लगाए।

नियंत्रण

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  4. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  5. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  6. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  7. मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  8. खरपतवार नियंत्रण करें।

  9. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  10. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में
    लगाए।


 

कीट

  हाईलेमया सीलीकरुरा

प्रचलित नाम

  बीज मेंगट 

क्षति

  1. यह फोटो बीज मेंगट का है।

  2. मेंगट अवस्था में सबसे ज्यादा क्षति पंहुचते है।

  3. यह बीज और अकुंर पर भोजन के लिए निर्भर रहते है।

  4. मेंगट अंकुरित बीजों को खा जाते है और उनकी जड़े भी खा लेते है।

आई.पी. एम.  

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  4. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  5. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  6. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  7. मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  8. खरपतवार नियंत्रण करें।

  9. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  10. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

  1. बोनी के पहले 10 जी. फोरेट 10 कि.ग्रा /हे का खेत में छिड़काव करे।

  2. बीज के उपचार के लिए कार्बोफयुरन 75 डब्लू पी 5 ग्रा /हे की दर से करने पर कीट का आक्रमण रोका जा सकता है।

  3. यदि फसल पर आक्रमण हो तो डाईमेथोएट 30 इ.सी. 0.03 प्रतिशत की दर से पानी में घोल कर
    छिड़काव करे।


 

कीट

 एग्रोटीस इपसलन

प्रचलित नाम

 कटुआ इल्ली

क्षति

  1. यह फोटो कटुआ इल्ली का है।

  2. लार्वा अवस्था में क्षति ज्यादा पहुंचाते है।

  3. अक्सर पौधों को जमीन की सतह से काटकर खाते है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  4. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  5. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  6. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  7. मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  8. खरपतवार नियंत्रण करें।

  9. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  10. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में
    लगाए।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

  1. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से

  2. मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  3. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  4. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  5. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।


 

कीट

 सिनोरेन 

प्रचलित नाम

 नीला बीटल

क्षति

  1. यह फोटो नीले बीटल का है।

  2. मेगंट अवस्था में क्षति पहुंचाता है।

  3. भोजन के लिए बीज, अकुंरित पौधो पर निर्भर रहता है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. रसायनिक नियंत्रण आर्थिक देहली स्तर 4 लार्वा / मीटर लम्बाई होने पर ही करें।

  3. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  4. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  5. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  6. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  7. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  8. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  9. खरपतवार नियंत्रण करें।

  10. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  11. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में
    लगाए।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

  1. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  2. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  3. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  4. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।


 

कीट

  डाईक्रेशिया ओरीचेलशिया, क्राईसोडिएकसीस एक्युटा

प्रचलित नाम

  हरी अर्धकुड़लाकार इल्ली

क्षति

  1. यह फोटो हरी अर्ठ्ठकुड़लाकार इल्ली का है।

  2. लार्वा अवस्था में ज्यादा क्षति देते है।

  3. कीट पत्तियों पर निर्भर रहता है।

  4. ज्यादा मात्रा में कीट सारी पत्तियां खा जाता है और सिर्फ तना रह जाता है।

  5. फल्ली लगते समय छेद बनाकर दाना खा लेता है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. रसायनिक नियंत्रण आर्थिक देहली स्तर 3 लार्वा / मीटर लम्बाई होने पर ही करें।

  3. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  4. प्रतिरोधक किस्में जैसे एन. आर.सी.-7, पूसा 16, पूसा 20, पूसा 24, जे.एस. 80-41, पी.एस. 564, पी. के. 42 का उपयोग करें।

  5. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  6. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  7. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  8. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  9. खरपतवार नियंत्रण करें।

  10. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  11. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में
    लगाए।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

  1. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  2. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  3. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  4. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी.20 कि./हे का उपयोग करें।


 

कीट

  मोसीस अनडेटा

प्रचलित नाम

  भूरी अर्धकुड़लाकार इल्ली

क्षति

  1. यह फोटो भूरी अर्ठ्ठकुड़लाकार इल्ली का है।

  2. लार्वा अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचती है।

  3. यह सोयाबीन की पत्तियों पर निर्भर रहते है।

  4. ज्यादा मात्रा में कीट पौधों की सब पत्तियां खा लेते है और तना रह जाता है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. रसायनिक नियंत्रण आर्थिक देहली स्तर 4 लार्वा / मीटर लम्बाई होने पर ही करें।

  3. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  4. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  5. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  6. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  7. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  8. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  9. खरपतवार नियंत्रण करें।

  10. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  11. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

  2. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  3. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  4. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  5. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।


 

कीट

  स्पोडॉपटेरा इज़ीगुआ

प्रचलित नाम

  अलसी इल्ली

क्षति

  1. यह फोटो अलसी इल्ली की है।

  2. लार्वा अवस्था में ज्यादा क्षति होती है।

  3. सर्वप्रथम आक्रमण जुलाई में देखा जा सकता है।

  4. कीट पत्ती भोजी है।

  5. तरुण लार्वा प्रारंभिक अवस्था में नई बंद पत्तियों को खाता है।

  6. बड़े होने पर पूरी पत्तियां खा जाते है।

  7. लार्वा जाल सा बुन लेता है जिससे पत्तियां आपस में चिपक जाती है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  4. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  5. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  6. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  7. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  8. खरपतवार नियंत्रण करें।

  9. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  10. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

  2. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से

  3. मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  4. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  5. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  6. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।


 

कीट

  स्पोलोसोमा ओलीक्वा

प्रचलित नाम

  रोयेदार इल्लियां या कम्बल कीट

क्षति

  1. यह फोटो बिहार की रोयेदार इल्ली का है ।

  2. लार्वा अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाती है।

  3. कीट पत्तियों पर भोजन के लिए निर्भर रहता है।

  4. अगस्त के अंतिम सप्ताह में कीट आक्रमण करता है।

  5. तरुण लार्वा पत्ती के हरे भाग को खा लेता है जिससे पत्ती भूरी पीली दिखने लगती है।

  6. कीट पत्तियों को कोने से खाता है।

  7. पत्ती जाल की तरह दिखती है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. रसायनिक नियंत्रण आर्थिक देहली स्तर 5 वयस्क / मीटर लम्बाई होने पर ही करें।

  3. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  4. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  5. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  6. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  7. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  8. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  9. खरपतवार नियंत्रण करें।

  10. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  11. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।


    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

  1. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  2. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  3. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  4. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।


 

कीट

  एमसेक्टा मूराई

प्रचलित नाम

  लाल रोयेदार इल्ली

क्षति

  1. यह फोटो लाल रोयेदार इल्ली का है।

  2. लार्वा अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाती है।

  3. कीट पत्तियों पर निर्भर रहता है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  4. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  5. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  6. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  7. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  8. खरपतवार नियंत्रण करें।

  9. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  10. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

  1. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से

  2. मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  3. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  4. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  5. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।


 

कीट

  बरमरशिया टेबाकी

प्रचलित नाम

  सफेद मक्खी

क्षति

  1. यह फोटो सफेद मक्खी का है।

  2. यह बहुभोजी कीट है।

  3. प्रौढ़ अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाती है।

  4. ये पत्तियों की कोशिकाओं का रस चूसते है।

  5. पत्तियां पीली पड़ जाती है।

  6. ये मोजाइक रोग को फैलाते है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  4. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  5. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  6. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  7. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  8. खरपतवार नियंत्रण करें।

  9. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  10. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

  2. बोनी के पहले 10 जी. फोरेट 10 कि./हे का उपयोग करें।

  3. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  4. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  5. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  6. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।


 

कीट

  इमपोस्का इन्डीकस

प्रचलित नाम

  हरा मच्छर 

क्षति

  1. यह फोटो हरे मच्छर का है।

  2. पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते है।

  3. अधिक आक्रमण पर पत्तियां सूख जाती है और गिर जाती है जिससे पौधा पत्ती रहित हो जाता है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  4. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  5. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  6. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  7. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  8. खरपतवार नियंत्रण करें।

  9. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  10. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

  2. बोनी के पहले 10 जी. फोरेट 10 कि./हे का उपयोग करें।

  3. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से

  4. मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  5. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  6. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  7. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।


 

कीट

 केलिओथिप्स इन्डीकस

प्रचलित नाम

 थिप्स

क्षति

  1. यह फोटो थिप्स का है।

  2. यह बहुभोजी है।

  3. वयस्क अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाती है।

  4. यह अत्याधिक रस चूसने वाला कीट है।

  5. संक्रमित पौधा सफेद भूरा हो जाता है। पत्ती सूख जाती है। और सारी पत्तियां गिर जाती है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  3. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  4. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  5. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  6. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  7. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  8. खरपतवार नियंत्रण करें।

  9. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  10. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

  2. बोनी के पहले 10 जी. फोरेट 10 कि./हे का उपयोग करें।

  3. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  4. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  5. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  6. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।


 

कीट

 नेजेरा विरीडुला 

प्रचलित नाम

 हरा गंधी बग

क्षति

  1. यह फोटो हरी गंधी बग का है।

  2. यह बहुभोजी है।

  3. ये फल्ली का रस चूसते है।

  4. दाने सिकुड़ जाते है।

  5. प्रभावित भाग सड़कर भूरा या काला हो जाता है।

  6. यह अत्याघिक रस चूसने वाला कीट है।

आई.पी. एम. 

  1. क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।

  2. रसायनिक नियंत्रण आर्थिक देहली स्तर 1 बग / मीटर लम्बाई होने पर ही करें।

  3. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  4. प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।

  5. मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।

  6. उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।

  7. अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।

  8. पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।

  9. खरपतवार नियंत्रण करें।

  10. जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।

  11. सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।

नियंत्रण

  1. रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:

     

  2. बोनी के पहले 10 जी. फोरेट 10 कि./हे का उपयोग करें।

  3. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से

  4. मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।

  5. ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  6. क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।

  7. मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।


M.P. Krishi
 
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