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मुद्रा 2015-16

बीज गुणवत्ता

प्रस्तावना

  1. राज्य में फसलो की उत्पादकता एवं उत्पादन बढाने में कृषि आदानों का विशेष महत्व है। बीजों की गुणवत्ता का फसल उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। राज्य में बीजों की खपत में उत्तरोत्तर वृध्दि हो रही है। कृषि उत्पादन में बीज अतिविशिष्ट आदान है। प्रदेश के किसानो को उनके द्वारा बीज के रूप में चुकायी गई कीमत का लाभ उत्पादन के रूप में प्रापत हो सके, इसके लिए बीज की गुणवत्ता कायम रखना महत्वपूर्ण है।

  2. बीज अधिनियम, 1966, बीज नियम 1968 एवं बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 में विहित प्रावधान अनुसार बीज व्यापार पर प्रभावी नियंत्रण हेतु विभिन्न स्तरों पर निर्धारित दायित्वों का सही ढंग से सक्षम क्रियान्वयन के लिये यह निर्देश जारी किये जा रहे हैं।

वैधानिक स्थिति 

भारत सरकार ने बीज के सुदृढ व्यवसाय (उत्पादक/विक्रेता) तथा उसकी गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिये बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 एवं बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 जारी किया है, जिसकी विभिन्न धाराओं के अंतर्गत बीज की गुणवत्ता एवं व्यापार नियंत्रित है। इसके तहत बीजों के विक्रय, निर्यात, आयात और भंडारण, आदेश के अधीन बीजो को दी गई अनुज्ञप्ति के निबंधनो और शर्तो के अधीन एवं उसके अनुसार गुणवत्ता एवं व्यापार नियंत्रित होता है। 

बीज परिभाषा -: 

बीज अधिनियम 1966 की धारा 2(11) के तहत 'बीज' निम्नानुसार श्रेणियों में वर्गीकृत है जो बोने या रोपण के लिये उपयोग में लाया जाता है।
(1) खाद्यानों जिनमें खाद्य तेलो के बीज सम्मिलित है, तथा फलों एवं सब्जियों के बीज।
(2) कपास बीज।
(3) पशुओं के चारे के बीज।
(4) जूट बीज ।
                                                               एवं
उपरोक्त में खाद्यान फसलों के अतिरिक्त पशुचारे की पौध, कन्द, बल्ब, राइजोम, जडें, कटिंग,सभी तरह के ग्राफट तथा अन्य वानस्पतिक रूप से तैयार पौध सामग्री सम्मिलित होगी।

वर्तमान स्थिति

  1. विगत तीन वर्षो के बीज के नमूनो के परीक्षण के आधार पर संकलित जानकारी अनुसार औसतन 3000 नमूनों का प्रतिवर्ष प्राधिकृत बीज निरीक्षकों ने परीक्षण कराया, इनमें से औसतन 275 नमूनो तक अमानक पाये गये । अत: बीज व्यापार की गुणवत्ता पर निरंतर निगरानी बनाये रखना और अमानक पाये गये नमूनों के संबंध में बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करना आवश्यक है।

  2. बीज का संसाधन भण्डारण विलंब से होने के कारण निरीक्षक द्वारा नमूने लेने में विलंब होता है। कही-कही नमूने लेने के उपरांत भी समय सीमा में परीक्षण हेतु या तो भेजे ही नही जाते या परीक्षण परिणाम विलंब से प्राप्त होने के कारण बीज लॉट की आंशिक अथवा संपूर्ण मात्रा का विक्रय हो चुका होता है। अत: नमूना लेने के तुरन्त बाद जॉच के लिये बीज परीक्षण प्रयोगशाला ग्वालियर भेजा जाना आवश्यक है एवम् प्रयोगशाला परिणाम भी संबंधित को समय सीमा में भेजने की व्यवस्था होनी  

व्यापार पंजीयन 

बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के नियम-8 के अन्तर्गत प्रत्येक बीज व्यवसायी (निजी विक्रेता एवं संस्थाये) जो बीज का व्यापार कर रहा है, द्वारा इस हेतु लायसेंस लेना आवश्यक है। प्रत्येक बीज व्यवसायी को लायसेंस अवधि समाप्ति के पूर्व उसका नवीनीकरण कराना होता है। इस हेतु बीज व्यवसायी को निर्धारित प्रपत्र में अनुज्ञापन अधिकारी (उप संचालक, कृषि) को आवेदन पत्र देना चाहिये। इसके साथ गोदान का नक्शा, निर्धारित फीस, बीज प्राप्ति के स्त्रोत का प्रमाण पत्र संलग्न करना आवश्यक है। 

अनुज्ञप्ति के लिये आवेदन तथा उसकी विधिमान्यता अवधि 

  1. ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो बीजों के विक्रय, निर्यात या आयात के लिये कोई अनुज्ञप्ति प्राप्त करना चाहता है बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के नियम-4 के अन्तर्गत रूपये 50/- की अनुज्ञप्ति फीस सहित दो प्रतियों में एक आवेदन प्ररूप 'क' में अनुज्ञप्ति हेतु अनुज्ञापन प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा।

  2. इस आदेश के अधीन प्रत्येक अनुज्ञप्ति जब तक कि वह पहले ही निलम्बित या रद्द नही की जाती है, उसके जारी किए जाने की तारीख से तीन वर्ष के लिए वैध रहेगी।

अनुज्ञप्ति का नवीनीकरण 

बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के नियम-7 के अन्तर्गत,

  1. ऐसा प्रत्येक अनुज्ञप्तिधारक जो अनुज्ञप्ति का नवीनीकरण कराना चाहता है, अनुज्ञप्ति की समाप्ति की तारीख से पूर्व रूपये 20/- की नवीनीकरण फीस सहित दो प्रतियों में नवीनीकरण के लिए एक आवेदन अनुज्ञापन प्राधिकारी को प्ररूप ''ग'' में करेगा। ऐसी फीस सहित ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर, अनुज्ञापन प्राधिकारी अनुज्ञप्ति का नवीनीकरण करेगा।

  2. यदि अनुज्ञप्ति की समाप्ति के पूर्व नवीनीकरण के लिए कोई आवेदन नही किया जाता है अपितु वह अनुज्ञप्ति की समाप्ति की तारीख से एक मान के अंदन किया जाता है तो अनुज्ञप्ति का नवीनीकरण, अनुज्ञप्ति के नवीनीकरण की फीस के अतिरिक्त रूपये 25/- की अतिरिक्त फीस के संदाय पर किया जा सकेगा।

अनुज्ञप्ति का संशोधन

बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के नियम-17 के अन्तर्गत, अनुज्ञापन प्राधिकारी, बीज व्यवसायी से रूपए 10/- की फीस सहित लिखित अनुरोध की प्राप्ति पर ऐसे व्यवसायी की अनुज्ञप्ति का संशोधन कर सकेगा। 

अनुज्ञापन अधिकारी की नियुक्ति

राज्य शासन द्वारा अनुज्ञापन अधिकारी की नियुक्ति बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के नियम 11 के अन्तर्गत की जाती है। म.प्र. शासन कृषि विभाग की अधिसूचना क्र बी.14-3-92-चौदह-2 दिनांक 15-3-2000 के द्वारा अनुज्ञापन अधिकारी की नियुक्ति व उनके अधिकारिता का क्षेत्र संसूचित है। (परिशिष्ट-4) 

अनुज्ञप्ति का दिया जाना  

बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के नियम-5 के अन्तर्गत,अनुज्ञापन प्राधिकारी, ऐसी जॉच जो वह ठीक समझ करने के पश्चात, किसी व्यक्ति को जो खंड 4 के अधीन उसके लिए आवेदन करता है प्रारूप ''ख'' में अनुज्ञप्ति दे सकेगा। 

  अनुज्ञप्ति हेतु अपात्र व्यवसायी:  

  1. जिसकी इस आदेश के अधीन दी गई पहली अनुज्ञप्ति को निलंबित कर दिया गया है, ऐसी निलंबन की तारीख से एक वष की अवधि तक:

  2. जिसकी इस आदेश के अधीन दी गई पहली अनुज्ञप्ति को निलंबित कर दिया गया है, ऐसी निलंबन की तारीख से एक वष की अवधि तक:

  3. जिसको आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का 10) के अधीन या उसके अधीन जारी किये गये किसी आदेश के अधीन दोषसिध्द किया गया है: आवेदन की तारीख से पहले पिछले तीन वर्ष के दौरान यदि उक्त अधिनियम के तहत दोषसिध्द किया गया हो।

  अनुज्ञप्ति दिये जाने से इंकार किया जाना : 

  1. जब अनुज्ञापन प्राधिकारी किसी ऐसे व्यक्ति को अनुज्ञप्ति देने से इंकार कर देता है जिसने खंड 4 के अधीन उसके लिए आवेदन किया है तो वह ऐसा करने के अपने कारणों को लेखबध्द करेगा।

 अनुज्ञप्ति का निलंबन या रद्द किया जाना  

  1. यह कि अनुज्ञप्ति किसी तात्विक विशिष्ट के बारे में गलत तथ्यों पर अभिप्राप्त की गई हो या

  2. यह कि इस अध्याय के किसी उपबन्ध या किसी अनुज्ञप्ति की शर्त का उल्लंधन किया गया हो।

व्यवसायी द्वारा स्टाक और मूल्य सूची का प्रदर्शन किया जाना

बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के नियम-8 के अन्तर्गत, प्रत्येक व्यवसायी कारोबार के अपने स्थान पर-

  1. अपने द्वारा धारित विभिन्न बीजों के दैनिक आधार पर प्रारंभिक अंतिम स्टाक को प्रदर्शित करेगा।

  2. विभिन्न बीजों के मूल्यो या दारो को उपदर्शित करने वाली सूची प्रदर्शित करेगा।

  3. अनुज्ञप्ति पत्र का प्रदर्शन करना।

  4. भण्डारण क्षमता

व्यवहारियो द्वारा क्रेता को ज्ञापन का दिया जाना 

प्रत्येक व्यवसायी बीज क्रेता को नकदी या प्रत्यय ज्ञापन देगा।

बीज वितरित करने की शक्ति

बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के नियम-10 के अन्तर्गत, जहॉ लोकहित में/ ऐसा करना आवश्यक समझा जाता हो वहां नियंत्रक लिखित आदेश द्वारा किसी उत्पादक या व्यवसायी को ऐसी रीति में जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाए, किसी बीज का विक्रय या वितरण करने का निर्देश दे सकेगा।

अपील

बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के नियम-16 के अन्तर्गत, ऐसा कोई व्यक्ति जो-

  1. बीजों के विक्रय, निर्यात या आयात की अनुज्ञप्ति देने, संशोधन करने, नवीनीकरण करने या इंकार करने वाले, ,

  2. किसी अनुज्ञप्ति का निलंबन या रद्द करने वाले आदेश से व्यथित है, ऐसे आदेश की तारीख से साठ दिन के अन्दर अपील प्राधिकारी को जो राज्य सरकार इस निमित्त हेतु निर्दिष्ट करे, अपील कर सकेगा और ऐसे प्राधिकारी का निर्णय अंतिम होगा, परन्तु अपील के लिए आवेदन के साथ पचास रूपये की अपील फीस संलग्न होगी।

बीज निरीक्षक की नियुक्ति 

राज्य शासन बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 की धारा 12 के अंतर्गत, आवश्यकतानुसार बीज निरीक्षकों की नियुक्ति एवं उनके क्षेत्र निर्धारित करतीहै, इस आधार पर म.प्र. शासन कृषि विभाग की अधिसूचना क्र. बी-14-3-92-चौदह-2 दि 15-3-2000 के द्वारा बीज नियम 1968 की धारा 22 के अंतर्गत निर्धारित योग्यता (कृषि स्नातक, एक वर्ष का बीज उत्पादन, विकास अथवा बीज विश्लेषण का अनुभव) रखने वाले अधिकारियों की प्राधिकृत निरीक्षको के रूप में की गई है। (परिशिष्ट-5)

बीज निरीक्षक के कर्तव्य/उत्तरदायित्व

बीज अधिनियम के अंतर्गत वर्णित कर्तव्यों के अतिरिक्त बीज निरीक्षक को निम्नानुसार कार्यो का निर्वहन करना होगा

  1. अपने कार्य क्षेत्र के प्रत्येक बीज व्यवसायी की दुकान/गोदाम का निरीक्षण प्रत्येक फसल मौसम में व कम से कम 2 महिनों में एक बार अवश्य करेगा।

  2. प्रत्येक बीज व्यवसायी अथवा प्रदायक द्वारा संधारित रिकार्ड का निरीक्षण करेंगे।

  3. यह सुनिश्चित करेगे कि प्रमाणीकरण प्रमाण पत्र / लेबलिग की शर्तो का पालन हो रहा है अथवा नही।  

  4. रसीद पर क्रेता / विकेता के हस्ताक्षर के साथ-साथ बीज की जाति बैच नं/लाट नं कीमत मात्रा एवं दिनांक के लख का सत्यापन सुनिश्चित करना।

  5. बीज लाट से बीज के नमूने निकालकर प्रयोगशाला को जॉच हेतु भेजना। नमूने लेने, प्रयोगशाला भेजने आदि की कार्रवाई बीज नियम 1968 की धारा 24 से 37 के अनुरूप होगी।
    बीज निरीक्षक द्वारा अधिसूचित फसल / किस्मों से नमूना लेने के समय अपनाई जाने वाली प्रक्रिया-
    5.1.  नमूने निकालने के लिये बीज व्यवसायी को लिखित सूचना देना।
    5.2.  निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप लिये गये तीन नमूनों का विवरण सहित सील बन्द करना जिसमें से एक उस व्यक्ति को दिया जावेगा जिसके अधिकार के बीज से नमूना लिया गया है।
    5.3.  एक नमूना बीज निरीक्षक अपने पास रखेगे तथा दूसरा नमूना संबंधित बीज परीक्षण प्रयोगशाला को भेजेगे।

  6. जहॉ यह शंका हो कि बीज अधिनियम/ नियमों / आदेशो के प्रावधानो का उल्लंधन हो रहा है, वहा नियमों के अन्तर्गत नमूने लेने, स्टाक जप्त करने, रिकार्ड जप्त करने जैसी विधि सम्मत कार्रवाई करना।

  7. प्राप्त शिकायातों की जॉच करेगे और अधिनियम/ नियमों/ आदेशो के विरूध्द कार्य पाये जाने पर विधि सम्मत कार्य करना।

  8. किये जाने वाले निरीक्षणो, जप्ती आदि का अभिलेख रखेगे , आयातित बीजों के संबंध में राज्य शासन से निर्देश प्राप्त कर तदनुसार कार्रवाई करना।

  9. जहॉ आवश्यक हो और बीज अधिनियम/नियम एवं बीज नियंत्रण आदेश 1983 का उल्लधंन हो रहा हो, वहां नियमानुसार न्यायालयीन कार्यवाही करना।

  10. प्रतिबंधित व अमानक बीज का व्यापार न हो, यह सुनिश्चत करना।

  11. बीज व्यवसायी को अनुज्ञापन जारी करने से पूर्व यह सुनिश्चित करना कि जिन उत्पादको के बीज का उनके द्वारा विक्रय करना प्रस्तावित है उनके उत्पाद का पूर्व रिकार्ड अच्छा हो। इस विषय में अपनी रिपोर्ट निर्धारित प्रपत्र में भेजना।

  12. समय-समय पर राज्य अनुज्ञापन अधिकारी / जिला अनुज्ञापन अधिकारी द्वारा दिये गये निर्देशो का पालन करना।

  13. यह सुनिश्चित करना कि बीज व्यवसायी अनुज्ञापन में दर्शाये बीजो का व्यापार कर रहा है।

बीज अधिनियम के अन्तर्गत बीज निरीक्षक के अधिकार :-

  1. बीज अधिनियम/नियम एवं बीज (नियंत्रण) आदेशो में निर्दिष्ट के नमूने लेने का अधिकार :-
    बीज विक्रेता से।

    1.1. ऐसे व्यक्ति से जो बीज व्यवसाय में उत्पादक एवं उपभोक्ता के मध्य व्यवसाय मे रत है।
    1.2. खरीददार से जिसने बीज क्रय कर लिया हो।


  2. ऐसे स्थानो पर औचित्य पूर्ण समय पर और ऐसी सहायता जो आवश्यक/ हो के साथ उन स्थानो में प्रवेश करना तथा खोज करता जहॉ यह विश्वास हो कि इस अधिनियम से संबंधित कोई अपराध हो रहा है।

  3. एसे अभिलेख अथवा वस्तु का परीक्षण / जप्ती करना जो अधिनियमों व आदेशो के अन्तर्गत गवाही के लिये उपयुक्त सिध्द हो सकती है।

  4. बीज निरीक्षक द्वारा विधि अनुसार निकाले गये बीज के नमूनो की कीमत का भुगतान सामान्य रूप से बेचे जाने वाले बीज की दर पर संबंधित व्यक्ति के द्वारा मॉगने पर दिये जाने का प्रावधान करेगा।

  5. बीज निरीक्षक को ऐसे स्थान पर जहां बीज/अभिलेख रखे गये हो का दरवाजा तोड़कर घुसने का अधिकार भी है बशर्ते की संबंधित व्यक्ति द्वारा दरवाजा खोलने से मना किया जावे। साथ ही ऐसी कार्यवाही करनते समय गवाही या क्रिमनल प्रोसिजर 1898 धारा 5 के प्रावधानों का अनुपालन करना अनिवार्य है। 

  6. जहॉ स्टॉक / अभिलेख जप्ती किया गया हो वहां तत्काल न्यायिक प्रक्रिया के अन्तर्गत वैधानिक कार्यवाही करने के अधिकार।

  7. बीज परीक्षण अधिकारी से संबंधित नमूने की जॉच रिपोर्ट मिलने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाने का अधिकार।

बीज निरीक्षक का रोस्टर

बीज निरीक्षक अपने कार्यक्षेत्र में बीज विक्रय व्यवसाय करने वाले डीलर्स थोक / फुटकर सहकारी समितियों तथा अन्य संस्थाओं के केन्द्रो का निम्नानुसार निरीक्षण करना सुनिश्चित करेगा। 

  1. प्रत्येक बीज विक्रय केन्द्र का निरीक्षण कम-से-कम माह में दो बार किया जावेगा।

  2. निरीक्षण के दौरान इस आदेश में दिये गये दिशा निर्देशो के अनुसार कार्रवाई।

  3. निरीक्षण के उपरान्त परिशिष्ट-3 के अनुसार प्रतिवेदन बनाया जाकर प्रतिवेदन की एक एक प्रति उप संचालक कृषि, आंचलिक प्रबंधक एवं संचालक कृषि को भेजना।

निरीक्षण के दौरान ध्यान देने योग्य बिन्दु

गुण नियंत्रण सुनिश्चित करने हेतु निरीक्षण करते समय बीज अधिनियम 1966 / बीज नियम 1968 व बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 की धाराओं के अन्तर्गत प्रावधानित बिन्दुओं का कड़ाई से पालन करना चाहिये। साथ ही :-

  1. बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 की धारा 5 के अंतर्गत निर्माता / डीलर द्वारा नगद / उधार ज्ञापन जारी किया जाता है इस ज्ञापन में निर्माता / व्यापारी द्वारा विक्रय किये जा रहे बीज का विवरण निर्धारित प्रपत्र मे हो इसका सत्यापन किया जाना चाहिये।

  2. निरीक्षण के समय यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक बोरे पर जिसमें बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के अनुसार लाट नंबर उल्लेखित करना अनिवार्य है, ऐसा किया गया है।  

  3. केशमेमो / क्रेडिट मेमो पर क्रेता एवं विक्रेता के हस्ताक्षर अवश्य होने चाहिये।

  4. निर्माता या थोक व्यापारी द्वारा यदि री-बैगिंग, ठीक होने योग्य त्रुटि दूर करना हो तो ऐसी स्थिति में उनके द्वारा अनुज्ञापन प्राधिकारी व प्रमाणित बीज होने पर बीज प्रमाणीकरण संस्था को पूर्व में सूचना देकर लिखित अनुमति प्राप्त की है क्या ?

नमूना लेने की विधि

बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 की खण्ड 13 अनुसूची -1 के अनुसार बीजो के नमूने का लेना सील बंद करना एवं विश्लेषण हेतु भेजना निम्न प्रक्रिया के अनुसार होगा।

नमूना लेने की रीति

विश्लेषण के प्रयोजन के लिये बीज के नमूने स्वच्छ, सूखे पात्र में लिये जाऐंगे जिसे पूर्ण रूप से मजबूती से बंद किया जाएगा जिससे कि उसमें से रिसन न हो और उसमे नमी न जा सके। इसे सावधानी पूर्वक सील बंद किया जाना चाहियें।

नमूना प्रगाढ़ता

थोक नमूना लेना - जब बीज का इकट्ठे ढेरो, वेगनों आदि में थोक भण्डारा किया जाता है तो निम्नलिखित नमूना प्रगाढ़ता को ''थोक नमूना'' लेने के लिये न्यूनतम अपेक्षा माना जाएगा।

  1. 501 से 3000 किलोग्राम तक प्रत्येक 300 किलोग्राम के लिये एक व्यष्टिक नमूना किन्तु कम से कम 5 व्यष्टिक नमूने।  

  2. 501 से 3000 किलोग्राम तक प्रत्येक 300 किलोग्राम के लिये एक व्यष्टिक नमूना किन्तु कम से कम 5 व्यष्टिक नमूने।

  3. 3001 से 20000 किलोग्राम तक - प्रत्येक 500 किलोग्राम के लिये एक व्यष्टिक नमूना किन्तु कम से कम 10 व्यष्टिक नमूने।
    थोक बीजो के लिये व्यष्टिक नमूनों को अनायास सभी ढेरों में बांट दिया जाएगा ओर विभिन्न मघ्यों से नमूने लिये जाएंगे।
     

थैला नमूना- 

थैलों या अन्य पात्रों में बीज के लाटो के लिये निम्न लिखित नमूना प्रगाढ़ता को न्यूनतम अपेक्षा के रूप में माना जाएगा।
(क) 5 पात्रो तक - प्रत्येक पात्र से एक नमूना किन्तु कम से कम 5 व्यष्टिक नमूने ले।
(ख) 6 से 30 तक - प्रत्येक 3 पात्रों में कम से कम एक नमूना किन्तु 5 से कभी कम नही हो।
(ग) 31 पात्र या अधिक// - प्रत्येक 5 पात्रों में कम से कम एक नमूना ले किन्तु 10 से कभी कम नही हो।
जब तक कि किसी लाट की एक रूपता के बारे में कोई सन्देह न हो ऐसे सभी प्रमुख नमूनों को बीज परीक्षण प्रयोगशाला में भेजने के लिये लाट का एक संयुक्त नमूना बनाने के लिये मिला लेना चाहिये। यदि व्यष्टिक या प्रारभिक नमूने पर्याप्त रूप से एक रूप नही है तो उन्हे विजातीय परीक्षण के लिए प्रयोगशाला को भेजा जाना चाहिये।
 

पात्रो पर लेबल लगाया जाएगा और पता लिखा जाएगा--

विश्लेषण के लिए नमूनो वाले सभी पात्रों पर समुचित रूप से लेबल लगाया जाएगा और पार्सलों पर सही-सही पता लिखा जाएगा। विश्लेषण के लिए भेजे गए बीज के किसी ीाी नमूने के लेबल पर निम्न लिखित लिख होगा-

क- कम संख्या :
ख- सरकारी पदाभिधान यदि कोई हो , के साथ भेजने वाले का नाम :
ग- उस व्यक्ति का नाम जिससे नमूना प्राप्त किया गया है:
घ- नमूना लेने की तारीख और स्थान:
ड- विश्लेषण के लिए, लिए गए बीज का प्रकार और किस्म:
च- नमूने के साथ जोड़े गए परिरक्षियो, यदि कोई हो की प्रकृति और मात्रा:
 

नमूनो को पैक ,करवाना और सील करने की रीति- 

विश्लेषण को भेजे गए बीजो के सभी नमूनो की निम्न लिखित रीति से पैक और सील बंद किया जाएगा-

  1. विश्लेषण को भेजे गए बीजो के सभी नमूनो की निम्न लिखित रीति से पैक और सील बंद किया जाएगा-डाट मजबूती से लगाई जाएगी जिससे के परिवहन में पात्रों से रिसन होना रोका जा सके।

  2. पात्र को तब तक मजबूत मोटे कागज में पूरी तरह से लपेटा जाएगा। कागज के किनारों को अच्छी तरह से मोडा जाएगा और उसे गोंद या अन्य चेपदार पदार्थ से चिपकाया जाएगा।

  3. पात्र के ऊपर और उसके चारों और कागज के आवरण को मजबूत सुतली या धागे मे मजबूती से बांध दिया जाएगा। सुतली या धागा सीलबंध करने वाले मोम से कागज के आवरण पर चिपकाये जाऐगे। इस पर भेजने वाले की मोहर के कम से कम चार सुभिन्न और स्पष्ट निशान होगे, जिनमे से एक पैकेट के ऊपर होगा, जबकि एक नीचे और अन्य दो पैकट पर ही होगे। सुतली या धागे की गॉठ को भेजने वाले की मोहर के निशान वाली सील को बंद करने वाली मोम से ढॅक दिया जाएगा।

मानीटरिग व्यवस्था

  1. बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के परिणामोन्मुखी प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निम्नानुसार मानीटरिग व्यवस्था अभिनिर्धारित की जाती है। तदनुसार प्रत्येक स्तर पर नियमित रूप से कार्य संपादन व मानीटरिग निर्देशानुसार सुनिश्चित की जावे-          

  2. 1.1 विकासखंड स्तर- बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 की आज्ञापक अपेक्षा अनुसार म.प्र. शासन कृषि विभाग की अधिसूचना बी-14-3-92-चौदह-2 दिनॉक 31-3-1998 द्वारा प्रदेश मे नियुक्त सभी वरिष्ठ कृषि/ उद्यान विकास अधिकारियो (निर्धारित योग्यता प्राप्त बीज निरीक्षको) को प्रत्येक फसल मौसम के प्रारंभिक दो माहों में उनके कार्यक्षेत्र के बीज विक्रय केन्द्रो / व्यापार केंन्द्रो से न्यूनतम 5 प्रतिशत बीज लाट्स के नमूने, अनुसूची-1 में दी गई प्रक्रिया का अनुसरण करते हुये लिये जावे व विश्लेषण उपरांत परिणाम संबंधितों को भेजे जावेंगे।

    1.2 इस कार्य की मासिक प्रगति संबंधित अनुविभागीय अधिकारी/उप संचालक कृषि को परिशिष्ट -1 में प्रेषित की जावेगी ।

  3. जिला स्तर पर - प्रत्येक जिले के समस्त बीज विक्रय / व्यापार केन्द्रो की जिले के समस्त बीज निरीक्षको की परिशिष्ट-1 में प्राप्त मासिक प्रगति की समीक्षा कर परिशिष्ट-2 में संकलन कर जिले के कलेक्टर/ मुख्य कार्यपालन अधिकारी को मासिक समीक्षा हेतु प्रेषित की जावें, तथा एक-एक प्रति संबंधित आंचलिक प्रबंधक व संचालक कृषि को भेजी जावे।
    जिले स्तर पर कलेक्टर / मुख्य कार्यपालन अधिकारी मासिक समीक्षा में जिले में लिये गये नमूनो की संख्या, बीज विक्रय केन्द्रो / व्यापार केन्द्रो पर विक्रित लाटस की संख्या के 5 प्रतिशत के आधार पर लक्षित संख्या विश्लेषण की स्थिति प्राप्त परिणामों में अवमानक बीज लाटस के संबंध में की गई आवश्यक कार्यवाही की समीक्षा करेंगे।
     

  4. अनुज्ञापन अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि क्या सभी बीज व्यवसायियो द्वारा अपने अनुज्ञापन का नवीनीकरण करा लिया है ?

अनुज्ञापन अधिकारी कार्यालय में रिकार्ड धारण करना-

जिला अनुज्ञापन अधिकारी द्वारा अपने कार्यालय में निम्नानुसार रिकार्ड संधारण करना अनिवार्य है-

  1. अनुज्ञापन प्रमाण-पत्र पंजी

  2. अनुज्ञापन प्रमाण-पत्र की कार्यालयीन प्रति.

  3. बीज व्यवसायी के गोदामों के नक्शों की प्रति.  जिले में उनके कार्यक्षेत्र से संबंधित के यहां व्यावसायी, बीजवार स्कंध

  4. विक्रय तथा बचत की जानकारी
     

थोक एवं फुटकर व्यवसायी द्वारा अपने सूचना पटल पर प्रदर्शित करना

  1. अनुज्ञापन प्रमाण-पत्र

  2. बीजों की मूल्य सूची

  3. बीजों के रकन्ध की जानकारी

  4. भण्डारण क्षमता



  5. उपरोक्त जानकारी बीज व्यवसायी की दूकान मे स्थापित बोर्ड पर प्रतिदिन अंकित करना अनिवार्य है ताकि कोई भी ग्राहक एवं अधिकारी संपूर्ण वस्तुस्थिति से अवगत हो सके।

बीज व्यवसायी द्वारा रखे जाने वाले रिकार्ड

  1. प्रत्येक बीज व्यवसायी अपने कारोगार से संबंधित ऐसी बहियों लेखो और अभिलेखों को जो राज्य सरकार द्वारा निर्देशित किया जाए बनाए रखेगा।

  2.  प्रत्येक बीज व्यवसायी मास के पांचवे दिन तक पूर्ववर्ती मास के कारोबार से संबंधित मासिक विवरणी बीज निरीक्षक अनुज्ञापन प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा।
     

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M.P. Krishi
 
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